विद्युत सुरक्षा विभाग की औरा कायमेरा सोसाइटी अध्यक्ष को सख्त चेतावनी, दस्तावेज न देने पर जेल-जुर्माना तय

सोसायटी में हादसे को दावत देता खुला पड़ा पैनल
विभु मिश्रा 
गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन स्थित औरा कायमेरा सोसाइटी में विद्युत सुरक्षा नियमों की अनदेखी का मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। निवासियों की पुरानी शिकायतों के बाद अब विद्युत सुरक्षा विभाग ने एओए अध्यक्ष सुशील कुमार को दूसरी बार सख्त चेतावनी के साथ नोटिस जारी किया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय में दस्तावेज नहीं मिले तो विद्युत अधिनियम के तहत तीन माह का कारावास और एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। 

इनकी शिकायत पर नोटिस

सोसाइटी निवासी अनिल कुमार त्यागी और संजय मिश्रा ने अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराईं थी। अनिल कुमार त्यागी ने 18 अप्रैल 2026 को सहायक निदेशक, विद्युत सुरक्षा, गाजियाबाद जोन को दी शिकायत में बताया कि पार्किंग एरिया और पार्क में बिजली के तार खुले लटके छोड़ दिए गए हैं। सभी टावरों में लिफ्ट, मीटर और फायर फाइटिंग सिस्टम पूरी तरह खुले पड़े हैं। जिनमें गिरने का डर सताता रहता है। सोसायटी में पहले करंट लगने से एक पुताईकर्मी का हाथ गंभीर रूप से झुलस चुका है। शिकायत में कहा गया कि 856 आवास के लिए केवल 447 किलोवोल्ट एम्पीयर भार स्वीकृत है, जबकि प्रति आवास खपत 3 से 4 किलोवोल्ट एम्पीयर है। 
पार्किंग में बेतरतीब छोड़े गए बिजली के तार

लिफ्ट और भार का मामला

हर टॉवर में 15-16 साल पुरानी एक-एक लिफ्ट बिना पंजीकरण के चल रही है। किसी भी लिफ्ट में ऑटोमैटिक बचाव यंत्र नहीं लगा है, जिससे बिजली जाने पर लोग फंस सकते हैं। शिकायत में आशंका जताई गई कि साथ लगी औरा मार्केट की 150 से 200 दुकानों का भार भी इसी स्वीकृत क्षमता से जोड़ दिया गया है। निवासियों ने टॉवर-वार निरीक्षण कर वास्तविक लोड की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। 

दूसरी बार जारी हुआ नोटिस

शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए सहायक निदेशक इ. सौरभ कुमार सिंह ने 25 मार्च 2026 को पहला नोटिस भेजा था। जवाब न मिलने पर 24 अप्रैल 2026 को दूसरी बार सख्त चेतावनी के साथ नोटिस जारी किया गया। इसमें सभी लिफ्टों के विद्युत सुरक्षा अनापत्ति प्रमाण-पत्र, रखरखाव जांच रिपोर्ट, हस्तांतरण प्रमाण-पत्र और 2364 किलोवाट स्वीकृत भार के दस्तावेज तुरंत मांगे गए हैं। उत्तर प्रदेश लिफ्ट और एस्केलेटर अधिनियम-2024 के तहत छह माह में पंजीकरण अनिवार्य बताया गया है। 

कारावास-जुर्माने की चेतावनी

नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि दस्तावेज न देने पर विद्युत अधिनियम-2003 की धारा-146 के तहत तीन माह का कारावास या एक लाख रुपये तक जुर्माना अथवा दोनों हो सकते हैं। भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना के लिए संघ अध्यक्ष को सीधे जिम्मेदार माना जाएगा। विभाग ने शिकायत का निस्तारण कर कार्रवाई रिपोर्ट देने को कहा है। नोटिस की प्रति जिलाधिकारी गाजियाबाद को भी भेजी गई है। फिलहाल संघ की ओर से कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया है। 

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