कानपुर किडनी कांड: छह लाख में खरीदी किडनी 80 लाख में बेची, आईएमए उपाध्यक्ष समेत पांच डॉक्टर और एक दलाल गिरफ्तार

 पीड़ित छात्र से पूछताछ करते अधिकारी
विभु मिश्रा 
उत्तर प्रदेश। कानपुर के किडनी रैकेट के खुलासे ने डॉक्टरों के उस पेशे पर गहरा दाग लगा दिया है, जिसे अब तक भगवान का दर्जा दिया जाता रहा है। आईएमए उपाध्यक्ष डॉ. प्रीति आहूजा समेत छह डॉक्टरों की गिरफ्तारी ने साफ कर दिया कि इलाज के नाम पर कैसे इंसानियत का सौदा किया जा रहा था। इस पूरे मामले ने मेडिकल सिस्टम की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इसी अस्पताल में चल रहा था किडनी ट्रांसप्लांट का खेल

किडनी बना मुनाफे का सौदा

बिहार के 23 वर्षीय एमबीए छात्र से उसकी किडनी महज 6 लाख रुपए में ली गई, जबकि उसी किडनी को एक महिला मरीज को करीब 80 लाख रुपए में बेच दिया गया। शिकायत के बाद खुला यह मामला बताता है कि यह कोई अलग-थलग घटना नहीं, बल्कि पैसों के लिए मजबूरी का शोषण करने वाला सुनियोजित नेटवर्क था।
मौके पर जांच करती पुलिस

छापेमारी में खुला अस्पतालों का खेल

पुलिस ने मेड लाइफ, आहूजा और प्रिया अस्पताल में एक साथ छापेमारी की। मेड लाइफ अस्पताल में डोनर और मरीज भर्ती मिले, लेकिन ट्रांसप्लांट से जुड़े कोई वैध दस्तावेज नहीं दिखाए जा सके। जांच में अस्पताल बिना पंजीकरण चलता मिला, जहां न योग्य डॉक्टर थे और न प्रशिक्षित स्टाफ। इसके बाद अस्पताल को सील कर दिया गया, जबकि आहूजा और प्रिया अस्पताल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
गिरफ्तार डॉक्टरो और दलाल की फोटो

आईएमए ने क्यों रोकी कार्रवाई

इस मामले में आईएमए उपाध्यक्ष डॉ. प्रीति आहूजा, उनके पति डॉ. सुरजीत, डॉ. राजेश कुमार, डॉ. राम प्रकाश, डॉ. नरेंद्र सिंह और दलाल शिवम अग्रवाल को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। इसके बावजूद आईएमए ने डॉ. प्रीति आहूजा के खिलाफ तत्काल कोई कार्रवाई नहीं की है। संगठन का कहना है कि जब तक कोर्ट में आरोप साबित नहीं होते, तब तक अनुशासनात्मक कदम नहीं उठाया जाएगा। दोष सिद्ध होने पर ही आगे की कार्रवाई के लिए मुख्यालय को प्रस्ताव भेजा जाएगा, जबकि दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग ने 50 से अधिक अस्पतालों को निगरानी में लेकर जांच का दायरा बढ़ा दिया है।

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