गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन की एसजी ग्रैंड सोसायटी से जुड़ा एक गंभीर व्हाइट कॉलर अपराध सामने आया है। सोसायटी के मेंटेनेंस फंड में लगभग 16.72 लाख रुपये के घोटाले और फर्जीवाड़े के आरोप में तीन पूर्व पदाधिकारियों के खिलाफ कोर्ट के आदेश पर नंदग्राम थाने में धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का मुकदमा दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई सोसायटी के मौजूदा सचिव अनुज मिश्रा की शिकायत पर न्यायालय सिविल जज (एसडी-6) के निर्देश के बाद हुई है।
तीन पूर्व पदाधिकारियों पर केस
जिन पूर्व पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है, उनमें एओए के पूर्व अध्यक्ष विनय गिल, पूर्व सचिव प्रेम सिंह और विकास चंद राय (पूर्व कोषाध्यक्ष) शामिल हैं। शिकायत में कहा गया है कि ये तीनों पद से हटने के बावजूद, नई कार्यकारिणी को वित्तीय अधिकार सौंपे बिना, एक राय होकर षड्यंत्र रचते रहे और सोसायटी के पैसे की बंदरबांट की। पूर्व सचिव प्रेम सिंह सोसायटी छोड़कर जा चुके हैं। वो बिहार शिफ्ट हो चुके हैं।
मेंटेनेंस फंड में सेंधमारी
एफआईआर में लिखा गया है कि इन पूर्व पदाधिकारियों ने सबसे बड़ी अनियमितता 16,72,616 रुपये की की। नई कार्यकारिणी के हस्ताक्षर बैंक में परिवर्तित नहीं होने का फायदा उठाकर, आरोपियों ने मेंटेनेंस खाते से यह मोटी रकम 'IFMS' (Interest Free Maintenance Security) नामक दूसरे खाते में अवैध तरीके से ट्रांसफर कर दी और निकाल ली। यह धनराशि सोसायटी के रोजमर्रा के रखरखाव और भविष्य के बड़े कार्यों के लिए रखी गई थी। शिकायत में स्पष्ट किया गया है कि इन पूर्व पदाधिकारियों द्वारा इस बड़ी निकासी का कोई वैध खर्च या साक्ष्य नहीं दिखाया गया है।
चेक से अनधिकृत भुगतान
लाखों रुपये के इस अवैध हस्तांतरण के अलावा, पूर्व पदाधिकारियों पर शिकायत में दो अन्य अनधिकृत भुगतान करने का भी आरोप है। उन्होंने 21 जनवरी 2025 को दो चेक के माध्यम से अवैध तरीके से सोसायटी के फंड का इस्तेमाल किया:
- 4,052 रुपये का चेक 'सूर्या पावर' को।
- 5,628 रुपये का चेक 'बालाजी इलेक्ट्रिकल्स' को।
सोसायटी के मौजूदा सचिव ने पुलिस को सौंपी गई तहरीर में जोर देकर कहा है कि यह सुनियोजित धोखाधड़ी है, जिसमें निवासियों के पैसे की खुलेआम हेराफेरी की गई है।
इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा
पुलिस ने न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए, तीनों पूर्व पदाधिकारियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। शिकायतकर्ता ने यह भी उल्लेख किया है कि चूंकि यह मामला एक संस्था के कोष से जुड़ा है, इसलिए इसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) और 409 IPC की धाराएं भी लागू होनी चाहिए। नंदग्राम पुलिस अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच कर रही है।
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