गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन स्थित फॉर्च्यून रेजिडेंसी सोसायटी में मार्च 2025 की मेंटेनेंस डिफॉल्टर सूची को लेकर चला आ रहा विवाद अब प्रशासन तक पहुंच गया है। कालातीत हो चुकी अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (एओए) द्वारा “लिखित सरकारी आदेश” की शर्त लगाए जाने के बाद अब सिटी मजिस्ट्रेट ने इस संबंध में स्पष्ट आदेश जारी कर दिया है।
एओए की शर्त और टालमटोल रवैया
सोसायटी निवासियों का आरोप है कि मार्च 2025 की मेंटेनेंस डिफॉल्टर सूची साझा करने के लिए कालातीत एओए लगातार यह कहती रही कि जब तक कोई लिखित सरकारी आदेश नहीं मिलेगा, तब तक सूची जारी नहीं की जाएगी। जबकि एओए का कार्यकाल पहले ही समाप्त हो चुका है। इस टालमटोल के चलते न केवल पारदर्शिता प्रभावित हुई, बल्कि सोसायटी के नियमों पर भी सवाल खड़े हुए।
डीएम तक पहुंची शिकायत
मामले को लेकर सोसायटी निवासी विपिन कुमार बलियान द्वारा जिलाधिकारी कार्यालय में लिखित शिकायत दी गई। शिकायत में बताया गया कि एओए का कार्यकाल 20 जुलाई 2025 को समाप्त हो चुका है, इसके बावजूद न तो समय पर चुनाव कराए गए और न ही मार्च 2025 तक की डिफॉल्टर सूची सार्वजनिक की गई। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि उप-पंजीयक द्वारा निर्धारित समय-सीमा का पालन नहीं कराया गया।
सिटी मजिस्ट्रेट का आदेश
शिकायत के बाद प्रशासन ने संज्ञान लेते हुए कार्रवाई की। सिटी मजिस्ट्रेट गाजियाबाद ने इस मामले में लिखित आदेश जारी करते हुए डिप्टी रजिस्ट्रार को निर्देश दिए हैं कि मार्च 2025 तक की मेंटेनेंस डिफॉल्टर सूची नियमों के अनुसार जारी कराई जाए। आदेश में यह भी कहा गया है कि जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए और डिफॉल्टर सूची की प्रति प्रशासन को भी उपलब्ध कराई जाए। अब जबकि लिखित सरकारी आदेश जारी हो चुका है, निवासियों का कहना है कि कालातीत एओए के पास सूची रोकने का कोई आधार नहीं बचता।
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