- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
मौन एक्सप्रेस
पटना। बिहार की सियासत और क्रिकेट की पिच पर एक साथ बैटिंग करने वाले राकेश कुमार तिवारी इन दिनों 'क्लीन बोल्ड' होते नजर आ रहे हैं। बिहार बीजेपी के प्रदेश कोषाध्यक्ष और बिहार क्रिकेट एसोसिएशन (BCA) के अध्यक्ष राकेश तिवारी के खिलाफ पटना की अदालत ने गिरफ्तारी का वारंट (NBW) जारी कर दिया है। यह कार्रवाई एक विज्ञापन कंपनी की शिकायत पर हुई है, जिसके बाद अब पुलिस उनकी तलाश में जुट गई है।
36 लाख का वो 'विवादित' विज्ञापन खेल
पूरा मामला 'अस्तित्व एडवर्टाइजिंग' नाम की एक कंपनी की शिकायत से जुड़ा है। कंपनी का आरोप है कि राकेश तिवारी ने सीसीटीवी कैमरे लगवाने और विज्ञापन दिखाने के नाम पर उनके साथ करीब 36 लाख रुपये की ठगी की है। चर्चा है कि इस काम के लिए नगर निगम के फर्जी एनओसी (NOC) का सहारा लिया गया था। अदालती सूत्रों के मुताबिक, जब तिवारी बार-बार बुलाने पर भी कोर्ट नहीं पहुंचे, तो जज साहब ने कड़ा रुख अपनाते हुए पुलिस को उन्हें गिरफ्तार कर 3 फरवरी 2026 तक पेश करने का आदेश दे दिया।
मुर्दे के जाली दस्तखत और बैंक से हेराफेरी
पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, राकेश तिवारी की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं होतीं। बीसीए के एक पुराने मामले में उन पर बेहद संगीन आरोप हैं। सूत्र बताते हैं कि एसोसिएशन के एक पूर्व कोषाध्यक्ष की मौत के बाद उनके जाली दस्तखत कर बैंक से बड़ी रकम इधर-उधर की गई थी। पहले तो पुलिस ने इस मामले में ढील दी थी, लेकिन अब एक विशेष जांच समिति (SIT) ने इस फाइल को दोबारा खोलने की सिफारिश कर दी है।
खिलाड़ियों का 'सौदा' और फर्जी कागजात
चर्चा तो यह भी है कि बिहार क्रिकेट में खिलाड़ियों के चयन को लेकर भी बड़ा खेल हुआ है। सूत्रों का दावा है कि दूसरे राज्यों के खिलाड़ियों से लाखों रुपये लेकर उन्हें बिहार का फर्जी निवासी बनाया गया और टीम में जगह दी गई। जांच समिति ने पाया है कि पहले की जांच में कई अहम सबूतों, जैसे कॉल रिकॉर्डिंग और फर्जी जन्म प्रमाण पत्रों को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया था। अब इन सभी पुराने 'पापों' की दोबारा पड़ताल शुरू होने वाली है।
रसूख की ढाल और कानून का वार
राकेश तिवारी 2019 से क्रिकेट की कुर्सी पर जमे हैं और बीजेपी में भी उनकी अच्छी पकड़ है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अपने इसी प्रभाव के कारण वो अब तक बचे हुए थे और कई थानों में दर्ज मामलों में पुलिस उन्हें 'क्लीन चिट' दे रही थी। लेकिन अब कोर्ट के वारंट और नई जांच रिपोर्ट ने उनकी मुसीबतें बढ़ा दी हैं। जानकार मान रहे हैं कि अगर इस बार कानूनी शिकंजा कसा, तो तिवारी के लिए अपनी कुर्सी और साख बचाना मुश्किल हो जाएगा।
विशेष: रोचक और अपने से जुड़ी खबरों के लिए "मौन एक्सप्रेस" वॉट्सएप चैनल और फेसबुक पेज जरूर फॉलो करें।
Astitva Advertising Complaint
BCA President Fraud
Bihar BJP Treasurer
Bihar Cricket Scam
financial irregularities
Rakesh Tiwari BJP
Rakesh Tiwari Warrant
SIT Investigation Bihar
स्थान:
India
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें