सोने-चांदी की चमक पड़ी फीकी: निवेशकों के लिए 'अलर्ट' या 'अवसर'?

विभु मिश्रा 
भारतीय सर्राफा बाजार में पिछले कुछ दिनों से जारी रिकॉर्ड तेजी पर अचानक ब्रेक लग गया है। सोने और चांदी की कीमतों में आई इस अचानक गिरावट ने आम आदमी और निवेशकों के बीच हलचल पैदा कर दी है। हर कोई यह जानना चाहता है कि क्या यह कीमतों के गिरने की शुरुआत है या फिर खरीदारी का एक सुनहरा मौका।

​सोने की चाल: अस्थायी ठहराव

शेयर मार्केट एक्सपर्ट मनीषा रावल का मानना है कि सोने में आई यह नरमी वास्तव में 'हेल्दी करेक्शन' है। जब कीमतें लगातार आसमान छूती हैं, तो बड़े निवेशक अपना मुनाफा सुरक्षित करने के लिए बिकवाली करते हैं, जिसे 'मुनाफावसूली' कहा जाता है। घरेलू बाजार में ज्वैलरी की मांग और वैश्विक स्थितियों को देखते हुए सोने की बुनियादी स्थिति अभी भी मजबूत है। विशेषज्ञों के अनुसार, सोने में किसी बड़ी या स्थायी गिरावट की संभावना फिलहाल कम है, क्योंकि सुरक्षित निवेश के रूप में इसकी साख बरकरार है।

​चांदी की चमक ज्यादा क्यों धुंधली हुई?

​सोने की तुलना में चांदी में अधिक गिरावट देखी गई है। इस पर मनीषा का कहना है कि इसका मुख्य कारण चांदी का औद्योगिक उपयोग है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता या डॉलर में मजबूती आती है, तो चांदी पर दोहरा दबाव बनता है। एक तरफ निवेश की मांग कम होती है और दूसरी तरफ फैक्ट्रियों से आने वाली औद्योगिक मांग में भी सुस्ती की आशंका गहराती है। यही वजह है कि चांदी में उतार-चढ़ाव सोने के मुकाबले हमेशा अधिक तीव्र होता है।

निवेशकों के लिए एक्सपर्ट की राय

मनीषा रावल के अनुसार, इस गिरावट से घबराने की जरूरत नहीं है। बाजार का इतिहास रहा है कि वह एक सीधी लकीर में ऊपर नहीं जाता।
जल्दबाजी से बचें: कीमतों के गिरने के डर से अपना निवेश घाटे में न बेचें।
रणनीति बदलें: चांदी में जोखिम अधिक है, इसलिए इसमें एकमुश्त निवेश के बजाय टुकड़ों में पैसा लगाना (Step-by-step investment) हमेशा फायदेमंद रहता है।
धैर्य रखें: सोना अभी भी सुरक्षित निवेश का सबसे भरोसेमंद जरिया है।
मनीषा कहती हैं कि बाजार का साफ संदेश है कि निवेशकों को संयम और समझदारी से काम लेना चाहिए। वर्तमान गिरावट जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय बाजार की दिशा को बारीकी से समझने का समय है।

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