गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन स्थित वीवीआईपी एड्रेसेस अपार्टमेंट ऑनर्स एसोसिएशन को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। पूर्व में डिप्टी रजिस्ट्रार (फर्म्स, सोसाइटीज एवं चिट्स) कार्यालय ने सोसाइटी के ऑडिट के आदेश दिए थे और इसके लिए समयसीमा भी तय की गई थी। लेकिन तय समय बीत जाने के बाद भी ऑडिट पूरा नहीं कराया गया। अब डीआर कार्यालय द्वारा नियुक्त चार्टर्ड अकाउंटेंट की शिकायत पर डिप्टी रजिस्ट्रार ने कड़ा रुख अपनाया है और सख्त निर्देश जारी किए हैं।
2018 से अब तक का हिसाब
कार्यालय रिकॉर्ड के अनुसार वीवीआईपी एड्रेसेस एओए का पंजीकरण 11 मई 2018 को सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 और यूपी अपार्टमेंट एक्ट 2010 के तहत हुआ था। 17 दिसंबर 2025 को डीआर कार्यालय ने मामले की जांच और ऑडिट के लिए सीए मोहित कौशिक को नियुक्त किया गया था, जिन्हें वर्ष 2018 से वर्तमान तिथि तक के खातों की जांच करनी थी।
सीए की शिकायत
नियुक्त सीए ने 12 फरवरी 2026 को ई-मेल के माध्यम से डीआर कार्यालय को जानकारी दी कि उन्हें 2018 से अब तक की अवधि का ऑडिट करने के लिए नियुक्त किया गया है। उन्होंने कई बार ई-मेल और फोन के जरिए एसोसिएशन के अध्यक्ष से संपर्क कर ऑडिट शुरू करने के लिए बैठक तय करने का अनुरोध किया। सीए के अनुसार, अध्यक्ष ने आश्वासन दिया कि मामला सदस्यों की बैठक में रखा जाएगा और जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएंगे। लेकिन बार-बार याद दिलाने के बावजूद न तो कोई बैठक तय हुई और न ही रिकॉर्ड उपलब्ध कराया गया। आवश्यक दस्तावेज और सहयोग न मिलने के कारण ऑडिट शुरू ही नहीं हो सका।
पूर्व अध्यक्ष ने भी की शिकायत
मामले में 28 जनवरी 2026 को भी एक शिकायती पत्र एओए के पूर्व अध्यक्ष यज्ञदत्त त्यागी द्वारा कार्यालय में दिया गया था, जिसमें खा गया था कि पदाधिकारियों द्वारा ऑडिटर को अभिलेख नहीं दिये जा रहे हैं, जिससे सोसायटी का ऑडिट नहीं हो पा रहा है। इस पर डिप्टी रजिस्ट्रार ने सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 की धारा 24(2) का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि रजिस्ट्रार या अधिकृत अधिकारी द्वारा मांग किए जाने पर सोसाइटी के सभी पदाधिकारी लेखा पुस्तकों और अन्य अभिलेखों को निरीक्षण के लिए उपलब्ध कराने के लिए बाध्य हैं।
डीआर की सख्त चेतावनी
डीआर वैभव कुमार ने सख्त निर्देश दिया है कि नामित सीए को सभी वांछित दस्तावेज तत्काल उपलब्ध कराए जाएं, ताकि ऑडिट और जांच की कार्रवाई दो माह के भीतर पूरी हो सके। अन्यथा संबंधित धाराओं के तहत विधिक कार्रवाई की जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सोसाइटी पदाधिकारियों की होगी।
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