गाजियाबाद। नगर निगम की शनिवार को हुई बोर्ड बैठक बेतरतीब बढ़े हाउस टैक्स के मुद्दे पर हंगामेदार रही। बैठक शुरू होते ही पार्षदों ने महापौर सुनीता दयाल और नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक को घेर लिया और बढ़े हुए टैक्स पर कड़ी आपत्ति जताई। दोपहर तक भारी शोर-शराबे के बीच टैक्स दरों पर कोई अंतिम फैसला नहीं हो सका, हालांकि शहरवासियों को राहत देने के लिए महापौर ने कई अतिरिक्त छूट देने की घोषणा की।
बैठक शुरू होते ही हंगामा
नगर निगम मुख्यालय में जैसे ही बोर्ड बैठक शुरू हुई, पार्षदों ने बढ़े हुए हाउस टैक्स का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। कई पार्षदों ने इसे शहरवासियों पर आर्थिक बोझ बताते हुए विरोध किया। गुस्साए पार्षद धीरेन्द्र यादव ने विरोध जताते हुए सदन में अपना इस्तीफा तक दे दिया। दोपहर तक चले हंगामे के बीच टैक्स की नई दरों पर कोई ठोस निर्णय नहीं हो पाया।
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| बैठक में मौजूद मेयर और नगरायुक्त |
नई छूट की घोषणा
बढ़ते विरोध के बीच महापौर सुनीता दयाल ने शहरवासियों को राहत देने के लिए कई छूटों की घोषणा की। उन्होंने बताया कि करदाताओं को 77 प्रतिशत से 92 प्रतिशत तक की राहत दी जाएगी। इसके तहत 10 साल पुराने आवासीय भवनों को 25 प्रतिशत, 10 से 20 साल पुराने भवनों को 32.5 प्रतिशत और 20 साल से अधिक पुराने भवनों को 40 प्रतिशत तक छूट देने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा हाउस टैक्स का ऑनलाइन भुगतान करने पर 2 प्रतिशत और कचरा पृथक्करण करने वाले घरों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त छूट 1 अप्रैल से लागू की जाएगी। समय से टैक्स जमा करने पर मिलने वाली 20 प्रतिशत की छूट 31 मार्च 2026 तक जारी रखने का भी निर्णय लिया गया।
कारपेट एरिया से टैक्स
नगर निगम ने यह भी फैसला लिया कि अब हाउस टैक्स की गणना कवर्ड एरिया के बजाय कारपेट एरिया के आधार पर की जाएगी। इससे करदाताओं को करीब 20 प्रतिशत कम एरिया पर टैक्स देना होगा। महापौर ने यह भी स्पष्ट किया कि शासन से जो भी अंतिम निर्देश आएंगे, उसके अनुसार अभी जमा किए जा रहे हाउस टैक्स को आगे समायोजित किया जाएगा।
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| बैठक में अपनी-अपनी बात रखते पार्षद |
गेंद शासन के पाले में
बैठक के दौरान नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने साफ कहा कि हाउस टैक्स की दरों में कटौती का अंतिम अधिकार शासन के पास है। उन्होंने बताया कि नगर निगम की ओर से इस संबंध में प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा। नगर आयुक्त के इस बयान के बाद सदन में फिर हंगामा बढ़ गया। हालात को देखते हुए महापौर और नगर आयुक्त ने घोषणा की कि वे जल्द ही जनप्रतिनिधियों के साथ लखनऊ जाकर शासन के अधिकारियों से इस मसले पर चर्चा करेंगे, ताकि शहरवासियों को स्थायी राहत मिल सके।
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