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गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन स्थित गुलमोहर गार्डन सोसायटी में एओए चुनाव 2026 से पहले माहौल पूरी तरह गर्म है। 22 मार्च को होने वाले मतदान से पहले अब चर्चा सिर्फ उम्मीदवारों की नहीं, बल्कि टीम बनाम व्यक्तिगत नेतृत्व, पुराने कामकाज और भविष्य की दिशा को लेकर तेज हो गई है। सोसायटी के कई वरिष्ठ और जागरूक निवासियों ने खुलकर अपनी राय रखी है, जिसमें मौजूदा व्यवस्था पर सवाल और बदलाव की जरूरत दोनों साफ झलक रहे हैं।
पुरानी व्यवस्थाओं पर सवाल
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| संजय कांत |
वायु सेना से सेवा निवृत ग्रुप कैप्टेन संजय कांत ने पिछले वर्षों के कामकाज पर सवाल उठाते हुए कहा कि सोसायटी को पारदर्शिता और जवाबदेही नहीं मिल पाई। उन्होंने फेज-1 में घाटा, ऑडिट रिपोर्ट का अभाव, आधिकारिक ग्रुप पर मनमानी, सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरी, गंदगी और बिजली जैसी मूलभूत समस्याओं को प्रमुख मुद्दे बताया। उनके मुताबिक, वर्षों से एक ही तरह की टीमों के अलग-अलग चेहरे सामने आते रहे हैं, लेकिन व्यवस्था में ठोस बदलाव नजर नहीं आया।
चुनाव में बढ़ता तनाव
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| प्रीति गुप्ता |
निवासी प्रीति गुप्ता के अनुसार इस बार चुनाव का माहौल सामान्य नहीं है, बल्कि हर तरफ सही दिशा और नेतृत्व को लेकर चर्चा हो रही है। उन्होंने कहा कि अब लोग सिर्फ वादों के बजाय नेतृत्व की नीयत और क्षमता को देख रहे हैं। सोसायटी में इस बार स्पष्ट रूप से यह सवाल उठ रहा है कि कौन ऐसा नेतृत्व दे सकता है जो सभी को साथ लेकर चले और ठोस फैसले ले सके।
कानूनी नजरिए से तस्वीर
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| अलका शर्मा |
एडवोकेट अलका शर्मा का मानना है कि चुनाव से पहले सोसायटी में उत्सुकता के साथ तनाव भी साफ दिखाई दे रहा है। उनके अनुसार पिछले अनुभवों से निराश लोग अब बदलाव की तलाश में हैं और यही कारण है कि इस बार चुनावी मुकाबला पहले से ज्यादा दिलचस्प हो गया है। उन्होंने कहा कि मतदान और मतगणना के दिन तक यह माहौल और तेज रहने की संभावना है।
टीम राजनीति पर गहराई से बहस
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| सुरेंद्र जिंदल |
वरिष्ठ बैंकिंग विशेषज्ञ सुरेंद्र जिंदल ने चुनावी चर्चा को व्यापक नजरिए से रखते हुए कहा कि टीम आधारित चुनावों में अक्सर उम्मीदवार की व्यक्तिगत क्षमता से ज्यादा टीम और नेतृत्व का प्रभाव होता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कई बार मजबूत चेहरे भी हार जाते हैं, जबकि संगठित टीम बढ़त ले जाती है। उन्होंने टीम संकल्प और टीम उन्नति दोनों के पिछले अनुभवों का जिक्र करते हुए कहा कि टीम उन्नति के कार्यकाल में आंतरिक विवाद, त्यागपत्र और नेतृत्व पर सवाल सामने आए, जबकि टीम संकल्प के सामने भी संगठन को एकजुट रखने की चुनौती रहेगी अगर वह सत्ता में आती है।
नेतृत्व और भरोसे की कसौटी
चुनाव से पहले चल रही इन चर्चाओं से साफ है कि इस बार गुलमोहर गार्डन का चुनाव सिर्फ सीटों की लड़ाई नहीं रह गया है, बल्कि यह भरोसे, पारदर्शिता और नेतृत्व की क्षमता की परीक्षा बन गया है। निवासियों के बीच यह स्पष्ट संकेत है कि अब वे पुराने अनुभवों के आधार पर नए फैसले लेने के मूड में हैं और यही रुझान 22 मार्च के नतीजों को दिलचस्प बना सकता है।
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