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गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन की एसजी ग्रैंड सोसायटी में एओए की चुनावी गाड़ी चुनाव अधिकारी के मुद्दे पर अटक गई है। एक आदेश, फिर बदलाव, फिर शिकायत का ऐसा चक्र कि डीएम के बाद अब मामला डीआर की टेबल पर पहुंच गया है। कार्यवाहक पदाधिकारियों ने पत्र सौंपकर चुनाव अधिकारी की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं। साथ ही चुनाव अधिकारी बदलने की मांग की है।
कुर्सी पर रस्साकशी
जनवरी में सोसायटी कालातीत घोषित होने के बाद डीआर ने नियुक्त निर्वाचन अधिकारी जिला उद्यान अधिकारी को चुनाव की जिम्मेदारी दी थी। ढाई महीने तक चुनाव नहीं हो सका तो दो दिन पहले डीआर ने इन्हें हटाकर सहायक निदेशक मत्स्य को नया चुनाव अधिकारी नियुक्त कर दिया। एक पक्ष डीएम के पास पहुंचा तो डीएम ने दोबारा जिला उद्यान अधिकारी को ही चुनाव अधिकारी बनाए रखने का आदेश दे दिया।
नई शिकायत दर्ज
डीएम के आदेश के बाद अब एसजी ग्रैंड एओए के कार्यवाहक अध्यक्ष अरुण मलिक और सचिव ने डीआर वैभव कुमार को पत्र सौंपा है। पत्र में नियुक्त निर्वाचन अधिकारी जिला उद्यान अधिकारी की निष्पक्षता पर सीधा सवाल उठाया गया है। मांग की गई है कि इन्हें हटाकर किसी अन्य प्रशासनिक अधिकारी को चुनाव अधिकारी बनाया जाए। पत्र की प्रतिलिपि जिलाधिकारी गाजियाबाद और रजिस्ट्रार सोसायटी एवं चिट फर्म्स लखनऊ को भी भेजी गई है।
वायरल पत्रों पर सवाल
शिकायत में आरोप है कि नियुक्त निर्वाचन अधिकारी जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय से जारी आधिकारिक पत्र सोसायटी के भूपेन्द्र नाथ द्वारा पहले ही प्रसारित किए जा रहे हैं। इससे दस्तावेजों की प्राप्ति और साझा करने की प्रक्रिया पर संदेह खड़ा हो गया है। कुछ लोगों को अग्रिम जानकारी मिलने से निवासियों का भरोसा टूट रहा है। कई पत्र बिना आधिकारिक संबोधन के ही व्यक्ति के नाम से व्याख्या सहित फैलाए जा रहे हैं, जो भ्रामक हैं। तस्वीरें और सामग्री भी अधिकारियों से निकटता दिखाने के लिए प्रसारित की जा रही हैं।
नियमों की अनदेखी आरोप
पत्र में कहा गया है कि उपनियमों के अनुसार चुनाव प्रक्रिया वर्तमान पदाधिकारियों के मार्गदर्शन में होनी चाहिए, लेकिन यहां केवल एक व्यक्ति के सुझाव माने जा रहे हैं। सदस्यों को कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी जा रही है, सिर्फ अनौपचारिक और वायरल संदेशों से जानकारी मिल रही है। पहले निर्वाचन अधिकारी सोसायटी आकर प्रक्रिया समझाते थे, अब केवल कार्यक्रम साझा किए जा रहे हैं जिससे असमंजस है। बैठकें शनिवार या रविवार को कराने की मांग भी की गई है।
50 हजार नगद मांगने का विरोध
शिकायत में निर्वाचन अधिकारी जिला उद्यान अधिकारी द्वारा चुनाव व्यय के नाम पर 50 हजार रुपये नकद जमा कराए जाने पर भी आपत्ति जताई गई है। एओए का कहना है कि सोसायटी के निकासी नियमों के तहत नकद लेनदेन का प्रावधान ही नहीं है, सभी खर्च विधिवत बिल वाउचर से होते हैं। पूर्व में चुनाव समिति के जरिए पारदर्शी तरीके से खर्च हुए थे और पूरी प्रक्रिया व्यवस्थित रही थी। वर्तमान प्रक्रिया पुरानी पारदर्शी प्रणाली के विपरीत है, जिससे भ्रम और अव्यवस्था फैल रही है।
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