सनराइज ग्रीन्स आरडब्ल्यूए का महाफर्जीवाड़ा: 24 लाख की अवैध वसूली के लिए कंज्यूमर फोरम के नाम पर खेल, भड़का विभाग!
विभु मिश्रा
गाजियाबाद। इंदिरापुरम की नामचीन सोसायटी 'सनराइज ग्रीन्स' की रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन का बिजली घाटे के नाम पर एक ऐसा सनसनीखेज घपला सामने आया है, जिसने पूरी सोसायटी में भूचाल ला दिया है। आरडब्ल्यूए ने निवासियों की जेब काटने के लिए बकायदा 'कंज्यूमर फोरम' के नाम का इस्तेमाल कर फर्जीवाड़ा किया और वसूली के अवैध नोटिस जारी कर दिया। जब इस जालसाजी की भनक विद्युत उपभोक्ता व्यथा निवारण फोरम (सीजीआएफ) को लगी, तो फोरम बुरी तरह भड़क गया। फोरम ने इसे सीधे तौर पर कोर्ट की अवमानना मानते हुए अवैध वसूली पर तुरंत ताला जड़ दिया है और आरडब्ल्यूए के रसूखदार पदाधिकारियों को जेल व दंडात्मक कार्रवाई का अल्टीमेटम थमा दिया है।
डेढ़ लाख का घाटा रातों-रात 24 लाख पार
इस पूरे खेल की शुरुआत तब हुई जब आरडब्ल्यूए के खातों में बिजली मद का रहस्यमयी गणित सामने आया। आरडब्ल्यूए ने पहले जुलाई 2024 से दिसंबर 2024 तक के छह महीनों में महज 1,50,786 रुपये (करीब डेढ़ लाख) का मामूली घाटा दिखाया था, जिसकी कोई भी पारदर्शी रिपोर्ट निवासियों को नहीं दी गई। लेकिन जैसे ही वर्ष 2025 में बिजली विभाग ने शिकंजा कसते हुए ऑडिट रिपोर्ट मांग ली, आरडब्ल्यूए ने रातों-रात जादुई छलांग लगाई और इस घाटे को सीधे 23,99,354 रुपये (लगभग 24 लाख) पर पहुंचा दिया। छह महीने में घाटा अचानक 15 गुना कैसे बढ़ गया, इसका जवाब देने के बजाय आरडब्ल्यूए ने इसे दबाने की कोशिश शुरू कर दी।
कोर्ट के कंधे पर बंदूक रख चलाई गोली
जब इस भारी-भरकम 24 लाख रुपये के कथित घाटे को निवासियों से वसूलने की बात आई, तो आरडब्ल्यूए ने विरोध से बचने के लिए एक बेहद शातिर चाल चली। 23 मई 2026 को जारी नोटिस में आरडब्ल्यूए ने दावा कर दिया कि 'कंज्यूमर फोरम' की अदालत ने खुद उन्हें प्रीपेड मीटर वॉलेट से रोजाना प्रति स्क्वायर फीट के हिसाब से पैसे काटने का 'सख्त निर्देश' दिया है। आरडब्ल्यूए ने सोचा था कि कोर्ट-कचहरी के नाम पर निवासी चुपचाप अपनी जेब कटवा लेंगे और रोजाना उनके प्रीपेड मीटर से पैसा कटता रहेगा।
आरडब्ल्यूए पर भड़का फोरम
आरडब्ल्यूए का यह दांव उलटा पड़ गया और मामला सीधे सीजीआरएफ फोरम के सामने पहुंच गया। आरडब्ल्यूए की इस हिमाकत को देख फोरम का पर चढ़ गया है। फोरम के अध्यक्ष और अधीक्षण अभियंता अखिलेश सिंह ने तुरंत नोटिस जारी कर स्पष्ट किया है कि आरडब्ल्यूए के साथ बैठक में ऐसा कोई भी आदेश नहीं दिया गया था। नोटिस में कहा गया है कि आरडब्ल्यूए ने अपनी अवैध वसूली के लिए न्यायिक प्रक्रिया का झूठा इस्तेमाल कर सीधे तौर पर वैधानिक अवमानना की है। फोरम ने इस वसूली को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड करते हुए आरडब्ल्यूए को 7 दिन के भीतर हाजिर होने का अल्टीमेटम दिया है। फोरम ने चेतावनी भी दी है और कहा है कि क्यों न आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों के खिलाफ सीधे जेल भेजने और दंडात्मक विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जाए।
विशेष: अपने से जुड़ी खबरों के लिए "मौन एक्सप्रेस" वॉट्सएप चैनल और फेसबुक पेज जरूर फॉलो करें। कमेंट बॉक्स में कमेंट कर अपने सुझाव अवश्य दें।



टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें