उम्रकैद की सजा, हाथों में ब्रश... गाजियाबाद कोर्ट की दीवारों पर कैदी अरुण लिख रहा सुधार की कहानी

कोर्ट की दीवार पर पेंटिंग उकेरता अरुण
विभु मिश्रा 
गाजियाबाद। हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा हापुड़ का अरुण राणा इन दिनों गाजियाबाद जिला न्यायालय की दीवारों पर ऐसी तस्वीरें बना रहा है, जिन्हें देखकर लोग रुकने को मजबूर हो रहे हैं। कभी बीसीए की पढ़ाई करने वाला अरुण एक पारिवारिक विवाद के दौरान हुए अपराध के बाद जेल पहुंच गया था। अब वही अरुण जेल में रहते हुए अपनी पेंटिंग कला के जरिए कानून, न्याय और सुधार का संदेश दे रहा है। अदालत परिसर में बनाई जा रही उसकी पेंटिंग्स लोगों में न्याय व्यवस्था के प्रति भरोसा भी जगा रही हैं।

बीसीए छात्र से कैदी

हापुड़ जिले के मथरावली गांव निवासी अरुण राणा पेशेवर अपराधी नहीं था। वह बीसीए की पढ़ाई कर रहा था और सामान्य जिंदगी जी रहा था। बताया जाता है कि परिवार के अपमान और विवाद के दौरान उसके हाथों हत्या की वारदात हो गई, जिसके बाद उसे उम्रकैद की सजा मिली। जेल पहुंचने के बाद लंबे समय तक वह मानसिक तनाव में रहा, लेकिन बाद में उसने खुद को बदलने का फैसला किया। जेल में पड़े बेकार कागजों और एक पेंसिल से उसने स्केच बनाना शुरू किया। धीरे-धीरे यही शौक उसकी पहचान बन गया और जेल प्रशासन भी उसकी कला से प्रभावित हो गया।

जेल में बदली पहचान

अरुण ने जेल में सिर्फ खुद को ही नहीं बदला, बल्कि दूसरे कैदियों को भी नई राह दिखाई। करीब 11 साल के दौरान उसने जेल में बंद लगभग 700 कैदियों को पेंटिंग बनाना सिखाया। इनमें कई लोग जेल से बाहर निकलने के बाद इसी हुनर के जरिए रोजगार से जुड़ चुके हैं। जेल प्रशासन के मुताबिक अरुण का व्यवहार हमेशा शांत और अनुशासित रहा। उसका कभी किसी अन्य कैदी से विवाद तक नहीं हुआ। अच्छे आचरण और कला के कारण उसे जेल प्रशासन का सहयोग भी मिलता रहा।

योगी तक पहुंची कला

जेल में रहते हुए अरुण को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पेंटिंग बनाने का मौका मिला। उसकी बनाई पेंटिंग मुख्यमंत्री को भेंट भी की गई थी। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई को भी उसकी कलाकृति दी जा चुकी है। अब गाजियाबाद कोर्ट परिसर में वह न्याय, कानून और मुफ्त कानूनी सहायता से जुड़े संदेशों को दीवारों पर उकेर रहा है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का कहना है कि इन पेंटिंग्स का मकसद लोगों को कानून पर भरोसा रखने और जरूरतमंदों को निशुल्क कानूनी सहायता की जानकारी देना है। आज अरुण राणा की कहानी इस बात की मिसाल बन रही है कि जेल की सलाखों के पीछे भी जिंदगी को नई दिशा दी जा सकती है।

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