गाजियाबाद। साहिबाबाद के पूर्व विधायक अमरपाल शर्मा के संयोजन में वसुंधरा सेक्टर-7 में भगवान परशुराम जन्मोत्सव समारोह का भव्य आयोजन किया गया। अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण सभा के बैनर तले हुए इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे और बलिया सांसद सनातन पांडे मुख्य रूप से शामिल हुए। मुंबई से आए कलाकारों ने भगवान परशुराम की लीला का मंचन किया, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों से हजारों लोग कार्यक्रम में पहुंचे। हालांकि राजनीतिक गलियारों में इस आयोजन को केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि अमरपाल शर्मा के बड़े राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है।
कार्यक्रम में गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, जेवर, मेरठ, शामली, बागपत, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर समेत कई जिलों से ब्राह्मण संगठनों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने साफ संकेत दिया कि आयोजन का मकसद सामाजिक एकजुटता के साथ राजनीतिक ताकत दिखाना भी था। लंबे समय बाद किसी स्थानीय नेता ने इतने बड़े स्तर पर ब्राह्मण समाज को एक मंच पर लाने की कोशिश की, जिसे आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है।
ब्राह्मण वोट बैंक पर फोकस
मंच से अमरपाल शर्मा ने लगातार ब्राह्मण समाज की भूमिका, उसके योगदान और राजनीतिक हिस्सेदारी की बात उठाई। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज ने हमेशा देश और समाज को दिशा देने का काम किया है और अब समाज को सामाजिक व राजनीतिक रूप से उसका उचित सम्मान दिलाने की जरूरत है। उनके भाषण को राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा गया, जिसमें उन्होंने खुद को ब्राह्मण समाज की मजबूत आवाज के रूप में स्थापित करने की कोशिश की।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण वोट बैंक को लेकर सभी दलों के बीच अंदरखाने रणनीति चल रही है। ऐसे समय में अमरपाल शर्मा का यह आयोजन साफ तौर पर अपनी राजनीतिक उपयोगिता और पकड़ दिखाने का प्रयास माना जा रहा है। खासकर साहिबाबाद विधानसभा सीट को लेकर यह संदेश देने की कोशिश रही कि क्षेत्र में उनका जनाधार अब भी मजबूत है।
भीड़ के जरिए दिखाई ताकत
कार्यक्रम में जुटी भारी भीड़ और मंच की भव्यता ने भी राजनीतिक चर्चा को हवा दी। नेताओं की मौजूदगी, विभिन्न जिलों से आए प्रतिनिधि और लगातार सामाजिक एकजुटता की बातों ने इस आयोजन को पूरी तरह राजनीतिक रंग दे दिया। राजनीतिक हलकों में चर्चा रही कि यह आयोजन आगामी चुनाव से पहले अमरपाल शर्मा की शक्ति परीक्षा भी था, जिसमें उन्होंने यह दिखाने की कोशिश की कि वे आज भी हजारों लोगों को एक मंच पर जुटाने की क्षमता रखते हैं।
मंच से अमरपाल शर्मा ने समाज के लिए हर समय उपलब्ध रहने और राजनीतिक सम्मान दिलाने की बात कही। इसे उनके आगामी चुनावी इरादों से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि इस आयोजन के जरिए उन्होंने पार्टी नेतृत्व और विरोधियों दोनों को अपनी राजनीतिक ताकत का संदेश देने की कोशिश की है।
धार्मिक मंच से चुनावी संकेत
हालांकि कार्यक्रम धार्मिक और सामाजिक आयोजन के रूप में आयोजित किया गया था, लेकिन पूरे कार्यक्रम में राजनीतिक संदेश सबसे ज्यादा प्रभावी रहा। भगवान परशुराम की लीला, ब्राह्मण एकजुटता और सामाजिक सम्मान की बातों के बीच अमरपाल शर्मा ने जिस तरह खुद को केंद्र में रखा, उससे यह साफ हो गया कि वे आगामी विधानसभा चुनाव में अपनी दावेदारी को लेकर पूरी तरह सक्रिय हो चुके हैं।
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