गाजियाबाद। वैशाली स्थित स्काईटेक मगध में साहित्यिक माहौल उस समय खास बन गया, जब लेखिका लक्ष्मी अग्रवाल के काव्य-संग्रह ‘खिड़की पर बैठी कविता’ का भव्य लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया। सरन शब्द-गुंजन संस्था के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर के साहित्यकारों, कवियों और साहित्य प्रेमियों ने भाग लिया। समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकारा डॉ. सविता चड्ढा ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में अशोक गुप्ता मौजूद रहे। विशिष्ट अतिथि के तौर पर डॉ. ओमप्रकाश प्रजापति और डॉ. नीरजा मेहता ‘कमलिनी’ ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई।
साहित्यकारों का जुटान
कार्यक्रम का संचालन नयन नीरज ‘नायाब’ ने प्रभावशाली अंदाज में किया, जबकि आयोजन की जिम्मेदारी विकास अग्रवाल ने संभाली। समारोह में डॉ. मनोज कामदेव, संगीता वर्मा, बबली सिन्हा ‘वान्या’, गुंजन अग्रवाल, पूजा श्रीवास्तव, देवेन्द्र प्रकाश शर्मा, भूपेंद्र राघव, दीपिका वल्दिया, डॉ. अर्चना गर्ग, संगीता पीयूष गुप्ता, डॉ. ऋतु अग्रवाल, जोया, हिमांशु शुक्ला, अशोक कुमार, लवनीश सिंह और राजकुमार चौहान सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग मौजूद रहे।
कविता में दिखा जीवन
समारोह के दौरान सभी साहित्यकारों ने काव्य-पाठ कर माहौल को साहित्यिक रंग में रंग दिया। अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. सविता चड्ढा ने कहा कि पुस्तक में शामिल ईश वंदना बेहद प्रभावशाली है। उन्होंने कहा कि जो महिलाएं परिवार और कार्यक्षेत्र दोनों में संतुलन बनाकर चलती हैं, वही वास्तविक रूप से सफल कहलाती हैं। वहीं डॉ. नीरजा मेहता ‘कमलिनी’ ने कहा कि यह पुस्तक लेखिका के मन और जीवन की खिड़की की तरह है, जिसके जरिए उनके अनुभवों और भावनाओं को महसूस किया जा सकता है। मुख्य अतिथि अशोक गुप्ता ने कहा कि यह कृति घर की खिड़की के भीतर छिपी संवेदनाओं और कहानियों को शब्द देती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में लेखिका ‘खिड़की के बाहर’ की दुनिया पर भी नई रचनाएं लेकर आएंगी।
नारी जीवन के रंग
डॉ. ओमप्रकाश प्रजापति ने पुस्तक को नारी जीवन के विभिन्न पहलुओं को संवेदनशीलता से प्रस्तुत करने वाली रचना बताया। मंच संचालक नयन नीरज ‘नायाब’ ने कहा कि पुस्तक में पिता की छांव, मां-बेटी का रिश्ता, मिट्टी से जुड़ाव और जीवन के कई भावनात्मक पहलुओं को बेहद खूबसूरती से पिरोया गया है। इस मौके पर लेखिका लक्ष्मी अग्रवाल ने कहा कि ‘खिड़की’ उनके लिए केवल घर का हिस्सा नहीं, बल्कि दुनिया और खुद को देखने का माध्यम रही है। उन्होंने बताया कि इसी सोच से पुस्तक का नाम ‘खिड़की पर बैठी कविता’ रखा गया।
सम्मान और सांस्कृतिक प्रस्तुति
कार्यक्रम में नन्हीं गुंजन की नृत्य प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र रही, जिसने उपस्थित लोगों की खूब तालियां बटोरीं। समारोह के दौरान सभी अतिथियों और साहित्यकारों को अंगवस्त्र, स्मृति-चिह्न और पुष्पहार देकर सम्मानित किया गया। इसके साथ ही अद्विक प्रकाशन, ट्रू मीडिया, काव्य मंजरी मंच, डॉ. सविता चड्ढा, डॉ. अर्चना गर्ग, दीपिका वल्दिया, पूजा श्रीवास्तव और बबली सिन्हा ‘वान्या’ की ओर से लेखिका लक्ष्मी अग्रवाल को साहित्यिक योगदान के लिए विशेष सम्मान प्रदान किया गया। अंत में आयोजक विकास अग्रवाल ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।
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