विभु मिश्रा
गाजियाबाद। पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार गाजियाबाद तहसील के अधिवक्ताओं और बैनामा लेखकों ने गुरुवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी। सुबह तहसील खुलते ही बड़ी संख्या में वकील और बैनामा लेखक तहसील गेट तथा रजिस्ट्री कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। हड़ताल के चलते रजिस्ट्री और उससे जुड़े कई काम प्रभावित होते नजर आए। तहसील पहुंचे लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा और कई लोगों को अपने दस्तावेजी कार्य फिलहाल टालने पड़े।
सुबह से शुरू हुआ धरना
हड़ताल के पहले दिन ही तहसील परिसर में विरोध का माहौल दिखाई दिया। अधिवक्ता और बैनामा लेखक रजिस्ट्री कार्यालय के बाहर एकत्र हुए और सरकार के हालिया आदेश के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर विचार नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। हड़ताल की वजह से रजिस्ट्री संबंधी कार्यों की रफ्तार भी प्रभावित हुई।
नए आदेश पर विरोध
धरने पर बैठे वकीलों और बैनामा लेखकों का कहना है कि निबंधन विभाग द्वारा जारी नया आदेश रजिस्ट्री व्यवस्था की मौजूदा प्रणाली को प्रभावित करेगा। उनका आरोप है कि निजी संस्थाओं की भागीदारी बढ़ाने की कोशिश से वर्षों से इस कार्य से जुड़े लोगों की भूमिका कमजोर होगी। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार को ऐसा कोई भी निर्णय लेने से पहले अधिवक्ताओं, बैनामा लेखकों और अन्य संबंधित पक्षों से चर्चा करनी चाहिए थी।
बढ़ जाएंगी मुश्किलें
हड़ताल में शामिल लोगों का कहना है कि नए नियम लागू होने से प्रदेश भर में वकीलों, बैनामा लेखकों, स्टांप विक्रेताओं, कंप्यूटर ऑपरेटरों और मुंशियों के रोजगार पर असर पड़ सकता है। उनका दावा है कि इससे हजारों परिवार प्रभावित होंगे। साथ ही रजिस्ट्री कराने आने वाले आम लोगों को भी अतिरिक्त खर्च और नई प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ सकता है।
मांग पूरी होने तक आंदोलन
प्रदर्शन कर रहे अधिवक्ताओं और बैनामा लेखकों ने स्पष्ट कहा कि उनका विरोध किसी व्यक्ति या विभाग विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि उस व्यवस्था के खिलाफ है जिसे वे अपने हितों और जनता के लिए नुकसानदायक मानते हैं। उनका कहना है कि जब तक सरकार आदेश वापस नहीं लेती या उसमें आवश्यक संशोधन नहीं करती, तब तक अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रहेगी। हड़ताल की अवधि फिलहाल तय नहीं है, जिससे आने वाले दिनों में तहसील के रजिस्ट्री कार्य और अधिक प्रभावित हो सकते हैं।
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