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| प्रदर्शन करते पीड़ित खरीदार |
विभु मिश्रा
गाजियाबाद। राज नगर एक्सटेंशन में आशियाने का सपना देख रहे दर्जनों निवेशकों के साथ करीब 70 से 80 करोड़ रुपये की बड़ी धोखाधड़ी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। न्याय के लिए दर-दर भटक रहे पीड़ित निवेशकों ने अब हताश होकर जिलाधिकारी से इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगी है। निवेशकों का आरोप है कि पुलिस और प्रशासन की मिलीभगत के कारण मुख्य आरोपियों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जा रही है, जिससे तंग आकर वे यह आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर हैं।
इन प्रोजेक्ट्स में फर्जीवाड़ा
पीड़ितों के अनुसार, राज नगर एक्सटेंशन में 'मेसर्स एएसआर रीयलटेक लिमिटेड (सेंट्रल एवेन्यू)' और 'राइट अर्थ इन्फ्रा लिमिटेड' नामक दो निर्माणाधीन प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं। इनके मालिक क्रमशः संदीप गुप्ता और अरुण मक्कड़ हैं। इन बिल्डरों ने अपने सेल्स हेड दीपक शर्मा उर्फ निखिल शर्मा, शिवानी त्यागी, सारिका शर्मा और अन्य स्टाफ के साथ मिलकर एक सोची-समझी साजिश रची। उन्होंने लुभावने वादे कर निवेशकों को फ्लैट आवंटित किए और उनसे करोड़ों रुपये ऐंठ लिए।
बैंक भुगतान को बताया फर्जी
धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब पैसे लेने के बाद बिल्डरों ने अपने पूरे स्टाफ को वहां से भगा दिया। अब ये मालिकान निवेशकों को दिए गए दस्तावेजों को पूरी तरह फर्जी बता रहे हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि पीड़ितों ने सारा भुगतान आरटीजीएस (RTGS) और बैंक खातों के माध्यम से किया था, जिसके पुख्ता सबूत उनके पास मौजूद हैं। इसके बावजूद बिल्डर सीधे तौर पर अपनी जिम्मेदारी से मुकर रहे हैं।
पुलिस पर मिलीभगत का आरोप
पीड़ित निवेशकों ने स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि पुलिस बिल्डरों के साथ साठगांठ कर चुकी है। पुलिस मामले की गंभीरता को कम करने के लिए बेहद हल्की और छोटी-मोटी धाराओं में केस दर्ज कर रही है, जिससे आरोपियों को आसानी से शह मिल रही है। कोई भी अधिकारी उनकी बात सुनने को तैयार नहीं है, जिसके कारण सभी निवेशकों की आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय हो चुकी है।
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| बिल्डर साइट पर प्रदर्शन करते ठगी के पीड़ित |
प्रोजेक्ट्स सीज करने मांग
निवेशकों ने जिलाधिकारी को सौंपे पत्र में मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की विभिन्न संबंधित विभागों से निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही, दोनों विवादित प्रोजेक्ट्स को तत्काल प्रभाव से सीज किया जाए। पीड़ितों का कहना है कि यदि उन्हें जल्द ही न्याय नहीं मिला और उनकी गाढ़ी कमाई वापस नहीं दिलाई गई, तो प्रशासन उन्हें सामूहिक रूप से इच्छा मृत्यु की अनुमति प्रदान करे।
इन पीड़ितों ने उठाई आवाज
इस धोखाधड़ी के खिलाफ आवाज उठाने वाले और न्याय की गुहार लगाने वाले प्रमुख पीड़ितों में गुलशन त्यागी, सुनीता, चंचल त्यागी, देवेंद्र कुमार, शैलेंद्र सिंह, अनुज कुमार, चंदन जैन, प्रदीप चौधरी, गजेंद्र त्यागी और नितिन कुमार शामिल हैं। इन सभी का कहना है कि उनकी जीवनभर की कमाई इस प्रोजेक्ट में फंस चुकी है।
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