टैक्स की छोटी चूक पड़ सकती है भारी, वेतनभोगी कर्मचारी समय रहते करें ये काम

मौन एक्सप्रेस डेस्क
नई दिल्ली। नौकरीपेशा लोगों के लिए इनकम टैक्स की सही गणना करना बेहद जरूरी है। कई बार आय, निवेश या अन्य स्रोतों से होने वाली कमाई की पूरी जानकारी न देने पर टीडीएस अधिक कट जाता है या बाद में टैक्स विभाग की ओर से अतिरिक्त टैक्स जमा करने का नोटिस आ सकता है। ऐसे में वित्त वर्ष की शुरुआत में ही टैक्स से जुड़े दस्तावेजों और दावों को व्यवस्थित रखना भविष्य की परेशानियों से बचा सकता है।

फॉर्म 122 की भूमिका

इनकम टैक्स नियम, 2026 के तहत फॉर्म 122 कर्मचारियों और नियोक्ताओं के बीच टैक्स संबंधी जानकारी साझा करने का अहम माध्यम है। यदि किसी कर्मचारी ने वित्त वर्ष के दौरान नौकरी बदली है, अन्य स्रोतों से आय अर्जित की है या उस आय पर टीडीएस अथवा टीसीएस कटा है, तो उसकी जानकारी समय-समय पर नियोक्ता को देनी चाहिए। इससे वेतन पर कटने वाले टीडीएस का सही आकलन हो पाता है और बाद में अतिरिक्त टैक्स देनदारी की संभावना कम हो जाती है।

छूट और निवेश का रखें रिकॉर्ड

फॉर्म 124 के जरिए कर्मचारी एचआरए, एलटीसी, होम लोन ब्याज और अन्य वैध कर छूटों की जानकारी नियोक्ता को उपलब्ध करा सकते हैं। हालांकि किसी भी टैक्स छूट या निवेश का दावा करने के लिए संबंधित दस्तावेज और प्रमाण होना जरूरी है। यदि पर्याप्त सबूत नहीं दिए गए तो वित्त वर्ष के अंतिम महीनों में वेतन से अधिक टीडीएस कट सकता है, जिससे नकदी प्रवाह पर असर पड़ सकता है।

समय-समय पर करें समीक्षा

टैक्स विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि वेतनभोगी कर्मचारी एडवांस टैक्स की समय-सीमा से पहले अपने टैक्स भुगतान और आय के रिकॉर्ड की समीक्षा करें। इसके लिए फॉर्म 26एएस और एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (एआईएस) उपयोगी साधन हैं। इन दस्तावेजों की मदद से टैक्स भुगतान की स्थिति स्पष्ट रहती है, ब्याज या अतिरिक्त टैक्स के जोखिम से बचाव होता है और आयकर रिफंड भी समय पर मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

विशेष: अपने से जुड़ी खबरों के लिए "मौन एक्सप्रेस" वॉट्सएप चैनल और फेसबुक पेज जरूर फॉलो करें। कमेंट बॉक्स में कमेंट कर अपने सुझाव अवश्य दें।

टिप्पणियाँ