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मौन एक्सप्रेस डेस्क
लखनऊ। एक महिला घर में अकेली बैठी थी। मोबाइल पर कॉल आया, आवाज़ सख्त थी, बोला गया- “आपका आधार कार्ड अवैध कामों में इस्तेमाल हो रहा है…आपके खिलाफ FIR दर्ज है।” फिर शुरू हुआ वीडियो कॉल का सिलसिला… सामने पुलिस की वर्दी में एक अफसर… पीछे थाने जैसा माहौल… और अगले पल एक वॉरंट स्क्रीन पर। चार दिन तक महिला ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रही, घर से बाहर नहीं निकली, किसी से बात नहीं की और इसी दौरान उसने 47 लाख रुपये अपने हाथों से ठगों के खातों में ट्रांसफर कर दिए। ये कोई वेब सीरीज़ नहीं, लखनऊ की हकीकत है। मगर अब ये फिल्मी जालसाज पुलिस की गिरफ्त में हैं।
‘डिजिटल जेल’ का ड्रामा, वीडियो कॉल पर धमकियां
18 जुलाई को लखनऊ निवासी रीता भसीन के मोबाइल पर अज्ञात नंबर से कॉल आया। खुद को CBI अफसर बताकर आरोपी ने बताया कि महिला का नाम ड्रग तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे मामलों में सामने आया है। झट से वीडियो कॉल की गई। पुलिस वर्दी पहने हुए लोग, नकली थाने का माहौल, और कंप्यूटर स्क्रीन पर बनावटी FIR और अरेस्ट वॉरंट। फिर कहा गया कि उन्हें “डिजिटल अरेस्ट” में लिया जा रहा है, अगले चार दिन तक बाहर नहीं जाना, किसी को फोन नहीं करना, हर हरकत पर निगरानी होगी। डरी हुई महिला को लगातार कॉल कर दबाव में रखा गया और धीरे-धीरे 47 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा लिए गए।
तकनीक से ट्रेस, साइबर पुलिस की कार्रवाई
चार दिन बाद जब महिला को शक हुआ, तो उसने साहस करके साइबर क्राइम थाना, लखनऊ में शिकायत दर्ज कराई। इंस्पेक्टर बृजेश कुमार यादव और उनकी टीम ने तुरंत टेक्निकल सर्विलांस शुरू किया और पूरे ऑपरेशन को ट्रेस कर तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों में अनुराग तिवारी (सुल्तानपुर), प्रखर प्रताप सिंह (रायबरेली) और अनुपम सिंह (अंबेडकरनगर) शामिल हैं। इनके पास से दो मोबाइल, 14 ATM कार्ड, 7 चेकबुक और कई फर्जी दस्तावेज बरामद हुए हैं। पुलिस ने इन लोगों के फर्जी बैंक खातों में जमा 10.5 लाख रुपये फ्रीज कर दिए हैं।
पर्दे के पीछे थाने जैसा सेटअप, रिहर्सल जैसी ठगी
पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि आरोपियों ने अपने ठिकाने पर बाकायदा पुलिस स्टेशन जैसा सेटअप बना रखा था। वर्दी सिलवाकर तैयार की गई थी, बैनर, कंप्यूटर, डेस्क सब कुछ थाने जैसा दिखता था। यही सेटअप वीडियो कॉल में दिखाया जाता था जिससे पीड़ित भरोसे में आ जाए। ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर मानसिक रूप से दबाव बनाया जाता और फिर धीरे-धीरे खाता खाली करवा लिया जाता। अब पुलिस गिरोह के बाकी सदस्यों और बैंकिंग चैनल से जुड़े दलालों की भी तलाश कर रही है।
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