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विभु मिश्रा
नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा—अगली सुनवाई तक इन पर कोई जबरन कार्रवाई नहीं होगी। यह आदेश लाखों वाहन मालिकों के लिए राहत का तोहफा लेकर आया है।
कोर्ट का ब्रेक, सड़कों पर फिर दौड़ेंगे पुराने पहिए
12 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि नगर निकाय और पुलिस फिलहाल पुराने वाहनों को ज़ब्त या हटाने जैसी कार्रवाई न करें। कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार से चार हफ्तों में जवाब मांगा है कि आखिर उम्र-आधारित यह पाबंदी क्यों जरूरी है।
सिर्फ उम्र नहीं, देखिए कंडीशन
दिल्ली सरकार का कहना है कि अब वाहनों के उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए BS-VI फ्यूल, बेहतर PUC टेस्ट और आधुनिक तकनीक मौजूद है। ऐसे में केवल उम्र के आधार पर वाहनों को सड़क से हटाना सही नहीं है। सरकार का यह भी कहना है कि कई गाड़ियों की हालत उम्र से कहीं बेहतर होती है और उन्हें चलाना प्रदूषण के लिहाज से सुरक्षित है।
अदालत ने माना – मामला सिर्फ तकनीकी नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने माना कि यह मुद्दा सिर्फ पर्यावरण का नहीं, बल्कि लाखों लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी और जेब से जुड़ा है। पुराने वाहन खासकर मध्यम और निम्न-आय वर्ग के लोगों के लिए अब भी जरूरत हैं। कोर्ट ने इस संतुलन को देखते हुए फिलहाल पाबंदी पर रोक लगा दी।
राहत की सांस
इस फैसले के बाद दिल्ली-एनसीआर के सड़कों पर वे कारें और बाइकें भी दौड़ेंगी, जो अब तक ‘पुराने’ टैग के कारण डरी-सहमी खड़ी थीं। अगली सुनवाई में तय होगा कि क्या यह राहत अस्थायी है या स्थायी, लेकिन फिलहाल वाहन मालिकों के चेहरों पर मुस्कान लौट आई है।
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स्थान:
India
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