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सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने उड़ा दी गाजियाबाद नगर निगम की नींद, संसाधनों की भारी कमी, आदेश का पालन बड़ी चुनौती
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विभु मिश्रा
गाजियाबाद। सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देश ने गाजियाबाद नगर निगम की चिंता कई गुना बढ़ा दी है। आदेश साफ है — आठ हफ्तों में शहर की सड़कों से आवारा कुत्तों को हटाकर शेल्टर में रखा जाए। लेकिन हकीकत यह है कि निगम के पास न पर्याप्त शेल्टर हैं, न फंड, न ही पूरी प्रशासनिक तैयारी। इस बीच, आंकड़े बताते हैं कि सिर्फ 43 महीनों में 3 लाख से ज्यादा लोग डॉग-बाइट का शिकार हो चुके हैं।
43 महीनों में खौफनाक आंकड़ा
स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक, जनवरी 2022 से जुलाई 2025 तक गाजियाबाद में 3,07,000 डॉग-बाइट मामले दर्ज हुए। ये सिर्फ वो केस हैं जो सरकारी अस्पतालों और उपचार केंद्रों तक पहुंचे, जबकि असल संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है। सबसे ज्यादा शिकार बच्चे और बुजुर्ग बने, जिनके लिए अब सोसायटी के बाहर निकलना भी खतरे से खाली नहीं।
शेल्टर और ढांचा सबसे बड़ी चुनौती
गाजियाबाद नगर निगम के पास फिलहाल कोई बड़ा डॉग शेल्टर नहीं है, जो हजारों कुत्तों को लंबे समय तक रख सके। मौजूदा समय में सिर्फ दो ABC (Animal Birth Control) सेंटर हैं, जहां रोज़ करीब 50 कुत्तों का स्टेरिलाइजेशन किया जाता है और 2-3 दिन बाद उन्हें वापस छोड़ दिया जाता है। सुप्रीम कोर्ट का आदेश इस नीति को बदलकर स्थायी शेल्टर में रखने का है, जिससे निगम की परेशानी और बढ़ गई है।
बजट और संसाधनों का संकट
शेल्टर निर्माण, वैक्सीनेशन, भोजन, स्टाफ और मेडिकल सुविधाओं के लिए भारी फंडिंग की जरूरत होगी, जबकि निगम के मौजूदा बजट में इसके लिए अलग से प्रावधान नहीं है। इसके अलावा, पर्याप्त प्रशिक्षित स्टाफ और वाहनों की कमी भी कार्य को मुश्किल बना रही है।
रिकॉर्ड और हेल्पलाइन की भी कमी
सुप्रीम कोर्ट ने दैनिक आधार पर कुत्तों को पकड़ने का रिकॉर्ड रखने और एक सप्ताह के भीतर हेल्पलाइन नंबर शुरू करने का निर्देश दिया है। लेकिन फिलहाल न तो ऐसी कोई हेल्पलाइन चालू है और न ही रिकॉर्डिंग सिस्टम पूरी तरह तैयार है। इससे आदेश के समयसीमा में पालन को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
जनता की उम्मीद, निगम की चिंता
लोग चाहते हैं कि कोर्ट के आदेश के बाद कुत्तों के आतंक से राहत मिले, लेकिन नगर निगम के संसाधन और तैयारी देखकर राहत का रास्ता आसान नहीं दिख रहा। लोगों का कहना है कि यह कार्रवाई सिर्फ कागज़ पर न होकर ज़मीन पर दिखनी चाहिए।
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