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विभु मिश्रा
गाजियाबाद। रक्षाबंधन का त्योहार इस साल गाजियाबाद में खुशियों की जगह पानी और परेशानी लेकर आया। आसमान से बरसती आफत और जमीन पर नगर निगम की बदइंतजामी ने मिलकर पूरे शहर का हाल बेहाल कर दिया। आलम यह था कि सड़कों ने नदियों का रूप ले लिया और यहां तक कि मेयर सुनीता दयाल के घर के सामने भी 2-2 फीट पानी जमा हो गया। पिछले एक हफ्ते में यह दूसरा मौका है जब बारिश ने निगम के विकास के दावों की हवा निकाल दी।
जाम में फंसी बहनें, भाइयों का बढ़ा इंतजार
रक्षाबंधन के पावन पर्व पर, जब बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधने के लिए निकलीं, तो ट्रैफिक जाम ने उनका रास्ता रोक दिया। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे से लेकर एलिवेटेड रोड तक, हर तरफ पानी का राज था। रमाते राम रोड, नया गंज, मालीवाड़ा, पटेल नगर, जटवाड़ा, लोहिया नगर, नेहरू नगर, विवेकानंद नगर, और ब्रिज विहार जैसे इलाकों में तो गाड़ियां रेंग भी नहीं पा रही थीं। बहनों को घंटों जाम में फंसे रहना पड़ा, जिससे भाइयों का इंतजार और भी लंबा हो गया।
घरों में घुसा गंदा पानी, 'लाखों' का नुकसान
बारिश के बाद हुए जलभराव ने लोगों की जिंदगी को नरक बना दिया। आशिक नगर, शास्त्रीनगर, गांधी नगर, राजनगर एक्सटेंशन, आरडीसी, सूर्यनगर, वसुंधरा और वैशाली जैसे पॉश इलाकों के घरों में भी गंदा पानी घुस गया। फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य सामान बर्बाद हो गए, जिससे लोगों को लाखों का नुकसान हुआ।
जनता का गुस्सा 'सातवें आसमान पर'
गाजियाबाद के लोगों का गुस्सा अब सातवें आसमान पर है। सोशल मीडिया और मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायतों की बाढ़ आ गई है। लोगों का सीधा आरोप है कि नगर निगम के अधिकारी सिर्फ 'पैसा बटोरने' में लगे हैं और उन्हें जनता की परेशानियों से कोई मतलब नहीं। हर साल बारिश में शहर की यही हालत होती है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। अब जनता सवाल पूछ रही है कि आखिर कब तक उन्हें इस लापरवाही का खामियाजा भुगतना पड़ेगा?
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स्थान:
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