आर्यसमाज राजनगर में वेद प्रचार सप्ताह का शुभारंभ, पहले दिन हुआ यज्ञ-भजन और वेदोपदेश

कुमुद मिश्रा

गाजियाबाद। आर्यसमाज राजनगर में सोमवार से सात दिवसीय वेद प्रचार सप्ताह की शुरुआत हुई। पहले दिन वैदिक परंपराओं के अनुरूप यज्ञ, भजन और वेदोपदेश के कार्यक्रम आयोजित हुए, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। आचार्य विष्णुमित्र वेदार्थी ने यज्ञोपवीत संस्कार के महत्व और उपनयन संस्कार के वैदिक दर्शन पर विस्तार से प्रकाश डाला।

यज्ञोपवीत का महत्व समझाया

आचार्य विष्णुमित्र वेदार्थी ने बताया कि श्रावणी मास की पूर्णिमा पर आरंभ होने वाला ‘श्रावणी उपाकर्म’ स्वाध्याय और नए यज्ञोपवीत धारण करने का पर्व है, जो पौष मास तक चलता है। यह संस्कार विद्या अध्ययन, यज्ञ करने और जीवन के तीन ऋणों से मुक्ति का संकल्प दिलाता है। आचार्य ने कहा कि उपनयन संस्कार बालक को द्विज बनाने की प्रक्रिया है — पहला जन्म माता-पिता से और दूसरा जन्म आचार्य व विद्या से प्राप्त होता है।

गुरु-शिष्य परंपरा पर जोर

आचार्य ने बताया कि उपनयन संस्कार में माता-पिता यह घोषणा करते हैं कि वे अपने बालक को विशेषज्ञ आचार्यों को सौंप रहे हैं, ताकि वह धर्म, अर्थ और मोक्ष के पथ पर आगे बढ़ सके। पाठशाला में शिष्य को गुरु के इतना निकट आना चाहिए कि वह गुरु के विचारों के अनुरूप एकमन वाला बन जाए।

भजनों ने बांधा समां

पहले दिन के कार्यक्रम में आर्य भजनोपदेशक पंडित भीष्म आर्य के भजनों ने सभी का मन मोह लिया। यज्ञ के यजमान ज्ञानेन्द्र आत्रेय और आशा आत्रेय रहे। आर्यसमाज राजनगर के मंत्री सत्यवीर चौधरी ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर श्रद्धानंद शर्मा, डॉ. वीरेंद्र नाथ सरदाना, मोतीलाल गर्ग, सुभाष चंद्र गुप्ता समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे और विशेष योगदान दिया।




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