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विभु मिश्रा
नई दिल्ली। दिल्ली के प्रतिष्ठित कांस्टीट्यूशन क्लब में आज सचिव पद के लिए बीजेपी के दो दिग्गजों, सांसद राजीव प्रताप रूडी और पूर्व सांसद संजीव बालियान, के बीच जबरदस्त टक्कर होने जा रही है। 25 साल बाद इस ऐतिहासिक क्लब में नया इतिहास रचने की तैयारी है, और इस बार का चुनाव हर नजर को अपनी ओर खींच रहा है।
दिग्गजों का मुकाबला: अनुभव बनाम जोश
राजीव प्रताप रूडी, जो पिछले 25 साल से क्लब के सचिव रहे हैं, अपने अनुभव और उपलब्धियों के दम पर मैदान में हैं। उनके कार्यकाल में क्लब ने नई ऊंचाइयों को छुआ—आधुनिक सुविधाओं से लेकर सांस्कृतिक आयोजनों तक, हर क्षेत्र में बदलाव देखा गया। लेकिन इस बार चुनौती आसान नहीं। संजीव बालियान नए जोश, युवा दृष्टिकोण और बदलाव के वादे के साथ रूडी को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। बालियान का दावा है कि क्लब को और अधिक सक्रिय और समावेशी बनाने की जरूरत है। यह मुकाबला अनुभव और नवाचार का रोचक संगम बन गया है।
रिकॉर्ड मतदान की उम्मीद
कांस्टीट्यूशन क्लब के 1200 सदस्य, जिनमें सांसद और पूर्व सांसद शामिल हैं, इस चुनाव में वोट डालेंगे। आमतौर पर केवल 100 के करीब वोटर ही मतदान करते हैं, लेकिन इस बार उत्साह चरम पर है। सूत्रों के मुताबिक, 500 से ज्यादा वोटर आज वोट डाल सकते हैं, जो क्लब के इतिहास में एक रिकॉर्ड हो सकता है। क्लब के कॉरिडोर में चर्चा है कि यह चुनाव न सिर्फ सचिव का फैसला करेगा, बल्कि क्लब की भविष्य की दिशा भी तय करेगा।
इतिहास रचने को तैयार क्लब
कांस्टीट्यूशन क्लब में यह चौथा चुनाव है। इससे पहले 2009, 2014 और 2019 में चुनाव हुए, लेकिन इस बार का मुकाबला सबसे रोमांचक माना जा रहा है। खास बात यह है कि अन्य पदों—खेल सचिव राजीव शुक्ला, संस्कृति सचिव टी शिवा, और कोषाध्यक्ष जितेंद्र रेड्डी—के लिए उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं। सभी की निगाहें अब सचिव पद के नतीजों पर टिकी हैं, जो आज शाम तक सामने आएंगे।
क्या कहते हैं जानकार?
सियासी गलियारों में इस चुनाव को बीजेपी के भीतर की गतिशीलता का प्रतीक माना जा रहा है। रूडी के समर्थक उनके अनुभव और स्थिरता की बात करते हैं, जबकि बालियान के समर्थक बदलाव और नई ऊर्जा की वकालत कर रहे हैं। एक वरिष्ठ सदस्य ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “यह सिर्फ क्लब का चुनाव नहीं, यह बीजेपी के भविष्य के नेतृत्व की झलक है।”
क्यों खास है यह चुनाव?
ऐतिहासिक महत्व: 25 साल में पहली बार इतना कड़ा मुकाबला।
वोटरों का उत्साह: 500+ वोटरों की भागीदारी की उम्मीद।
नेतृत्व की जंग: अनुभव और नए विजन के बीच टक्कर।
सियासी असर: बीजेपी के आंतरिक समीकरणों पर नजर।
आज का यह चुनाव न सिर्फ कांस्टीट्यूशन क्लब की दिशा तय करेगा, बल्कि दिल्ली की सियासी हलकों में भी लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहेगा। नतीजों का इंतजार हर कोई बेसब्री से कर रहा है।
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