देविका स्काइपर में नलों से निकले कीड़े, डायरेक्टर दिनकर गिरी बोले – "ये कोई बड़ी बात नहीं"

फर्श पर रेंगते देविका स्काइपर सोसायटी के नलों से निकले कीड़े
विभु मिश्रा
गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन की देविका स्काइपर सोसायटी में रेजिडेंट्स गंदे और जहरीले पानी से त्रस्त हैं। नलों से कीड़े और सांप के बच्चे तक निकल रहे हैं, मगर बिल्डर का डायरेक्टर दिनकर गिरी इस गंभीर खतरे को भी हल्के में लेते हुए कहता है – “पानी में कीड़े निकलना कोई बड़ी बात नहीं।” इस गैर-जिम्मेदार रवैये ने निवासियों का गुस्सा फाड़ दिया है।

पानी के नाम पर जहर की सप्लाई

रेजिडेंट्स का कहना है कि पानी की टंकी कब साफ हुई, यह किसी को याद नहीं। शिकायतें बार-बार की गईं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। रेजिडेंट यज्ञ तिवारी ने बताया कि तीन-चार बार शिकायत करने के बावजूद हालात जस के तस हैं। बाथरूम और किचन के नलों से कीड़े और सांप के बच्चे निकल रहे हैं, जिससे सैंकड़ों रेजिडेंट्स की जान पर खतरा मंडरा रहा है। साफ पानी की जगह अब जहर सप्लाई हो रहा है।
सोसायटी के वॉट्सएप ग्रुप पर मेंटेनेंस विभाग को रेजिडेंट का मैसेज

एओए का बड़ा आरोप

एओए सदस्य मनोज पंवार का आरोप है कि बिल्डर सुविधा देने के बजाय उल्टा रेजिडेंट्स से मेंटेनेंस चार्ज बढ़ाने का दबाव बना रहा है। सोसायटी की हालत खस्ताहाल है – सीवर जाम, खराब फायर फाइटिंग सिस्टम और अब गंदा पानी। रेजिडेंट्स का कहना है कि वे हर महीने मोटी रकम मेंटेनेंस के नाम पर भर रहे हैं, लेकिन बदले में उन्हें सिर्फ खतरा और लापरवाही मिल रही है।

डायरेक्टर दिनकर गिरी का बेहया जवाब

सोसायटी के निर्माता बिल्डर ग्रुप के डायरेक्टर दिनकर गिरी ने इस गंभीर समस्या को मजाक में उड़ा दिया। उनका कहना है कि “पानी में कीड़े निकलना कोई बड़ी बात नहीं, ऐसा तो होता रहता है।” उन्होंने वाटर टैंक की सफाई के संबंध में कहा कि मेंटेनेंस देखने वाला लड़का छुट्टी पर है। इतना ही नहीं उन्होंने सीधे अपने वकीलों की भी धमकी दे दी कि इन समस्याओं का जवाब मेरे वकील देंगे। रेजिडेंट्स का कहना है कि जब खुद डायरेक्टर ही लोगों की जान से जुड़े मुद्दे को हल्के में ले रहा है, तो सुधार की कोई उम्मीद नहीं बचती।

प्रशासन की खामोशी पर भी सवाल

गाजियाबाद की कई सोसायटीज में पहले भी गंदे पानी से लोग बीमार पड़े हैं। प्रशासनिक जांच में टैंकों से छिपकली, मेंढक और सांप तक मिल चुके हैं। बावजूद इसके प्रशासन ने न तो बिल्डर्स पर कोई सख्त कार्रवाई की और न ही स्थायी समाधान किया। देविका स्काइपर का मामला बताता है कि बिल्डर्स और प्रशासन की लापरवाही मिलकर रेजिडेंट्स की जान को दांव पर लगा रही है।

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