नई दिल्ली। प्रगति मैदान के भारत मंडपम में आयोजित विश्व पुस्तक मेला-2026 के थीम पवेलियन में मंगलवार को एक बेहद भावुक और यादगार कार्यक्रम संपन्न हुआ। अद्विक पब्लिकेशन द्वारा आयोजित यह सत्र दिग्गज गीतकार आनंद बख्शी की स्मृति और भारतीय सेना के शौर्य को समर्पित था। "द कंट्रीब्यूशन ऑफ आनंद बख्शी: ए पोएट एंड लिरिसिस्ट" शीर्षक वाले इस कार्यक्रम में वक्ताओं ने बख्शी साहब के गीतों के माध्यम से राष्ट्रप्रेम की अलख जगाई। कार्यक्रम के दौरान उनके लिखे कालजयी गीत "दिल दिया है जान भी देंगे, ऐ वतन तेरे लिए..." की गूंज ने पूरे माहौल को देशभक्ति के रंग में सराबोर कर दिया।
साहित्य और राष्ट्रप्रेम का संगम
विश्व पुस्तक मेले की “शौर्य और प्रज्ञा” श्रृंखला के तहत आयोजित इस सत्र की शुरुआत किआन फाउंडेशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष शालिनी अगम ने "जय हिंद" के जोशीले उद्घोष के साथ की। मंच संचालन ऋषि कुमार शर्मा (पूर्व उप-सचिव, हिन्दी अकादमी) ने बेहद कुशलता से किया। कार्यक्रम में संगीता विजित ने श्रीराम के श्लोक "जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी" का पाठ कर भारतीय संस्कृति की महिमा बताई। इसके बाद उन्होंने जब अपनी आवाज में "वतन वालो वतन न बेच देना, ये धरती ये गगन न बेच देना" गुनगुनाया, तो वहां मौजूद दर्शक भाव-विभोर हो गए।
आनंद बख्शी के संघर्षों की गाथा
मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद आनंद बख्शी के पुत्र राकेश आनंद बख्शी ने अपने पिता के जीवन के अनछुए पहलुओं को साझा किया। उन्होंने 1945 की एक मार्मिक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे सीमित संसाधनों के बीच उनके पिता ने साहित्य सृजन किया। राकेश बख्शी ने कहा कि उनके पिता के गीत केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि आम आदमी की भावनाओं और जीवन के यथार्थ का आईना थे। उन्होंने कुछ व्यक्तिगत संस्मरण भी सुनाए, जिन्हें सुनकर श्रोता काफी प्रभावित हुए और तालियों से हॉल गूंज उठा।
संगीत जगत का स्वर्णिम दस्तावेज
विशिष्ट अतिथि और प्रतिष्ठित संगीतकार यूसुफ खान ने आनंद बख्शी की बायोग्राफी "नगमे किस्से बातें यादें" पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक सिर्फ एक व्यक्ति की जीवनी नहीं, बल्कि हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर का दस्तावेज है। कार्यक्रम के अंत में अद्विक पब्लिकेशन के निदेशक अशोक गुप्ता ने सभी अतिथियों का आभार जताया। इस आयोजन ने सिद्ध कर दिया कि आनंद बख्शी के शब्द आज भी भारतीय सांस्कृतिक चेतना और देशभक्ति की भावना को मजबूती देने का काम कर रहे हैं।
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