विभु मिश्रा
गाजियाबाद। राकेश मार्ग स्थित गुलमोहर एनक्लेव सोसाइटी में नगर निगम की संवेदनहीनता चरम पर है। महीनों से 700 टीडीएस वाला दूषित पानी पी रहे निवासियों की जब 'संभव जनसुनवाई' में गुहार सुनी गई, तो राहत के नाम पर उनके साथ भद्दा मजाक किया गया। निगम ने आनन-फानन में जो पानी का टैंकर भेजा, उसका टीडीएस भी 457 निकला। साफ़ पानी को तरस रहे लोग तब हतप्रभ रह गए जब सरकारी टैंकर का पानी भी मानकों पर फेल मिला। प्रशासन की यह लापरवाही साफ दर्शाती है कि अधिकारियों को जनता की सेहत की कोई चिंता नहीं है।
सिस्टम की खतरनाक अनदेखी
सोसाइटी निवासी गौरव बंसल ने डीएम कार्यालय और मुख्यमंत्री पोर्टल तक शिकायत की, लेकिन नतीजा सिफर रहा। अधिकारियों को वाटर टैक्स और मेंटेनेंस देने के बावजूद लोग बीमार होने को मजबूर हैं। हालात ये हैं कि घरों के वाटर प्यूरीफायर एक महीने में दम तोड़ रहे हैं। प्रशासन की चुप्पी यह सवाल उठाती है कि क्या वे किसी बड़े हादसे या स्वास्थ्य आपातकाल का इंतजार कर रहे हैं?
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| टैंकर के पानी का 457 टीडीएस दिखाता मीटर |
राहत बनी आफत का सबब
बुधवार को जब टैंकर सोसाइटी पहुँचा, तो लोगों को लगा कि अब स्वच्छ जल मिलेगा। लेकिन जब टीडीएस मापा गया तो वह 457 निकला। अश्वनी और राजेश श्रीवास्तव जैसे निवासियों ने नाराजगी जाहिर करते हुए बताया कि निगम शुद्ध पानी देने के बजाय प्रदूषित जल की आपूर्ति कर केवल औपचारिकता पूरी कर रहा है। यह सीधे तौर पर निवासियों के मौलिक अधिकारों का हनन और उनकी सेहत से खिलवाड़ है।
बुजुर्गों की बेबसी और लाचारी
नगर निगम की इस अव्यवस्था ने बुजुर्गों को सबसे ज्यादा प्रताड़ित किया है। बुजुर्ग रामशरण जग्गा ने बताया कि फ्लैटों में रहने वाले वृद्धों के लिए टैंकर से बाल्टियां ढोना शारीरिक रूप से असंभव है। बिना किसी उचित वितरण प्रणाली के टैंकर भेजकर प्रशासन ने केवल अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ा है। मजबूरन लोग अब ऊंचे दामों पर मिनरल वाटर खरीदकर प्यास बुझाने को विवश हैं।
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