रिवर हाइट्स: एओए अध्यक्ष और सचिव के झगड़े में गार्ड्स का धरना, एक-दूसरे पर मढ़े गंभीर आरोप

विभु मिश्रा 
गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन स्थित रिवर हाइट्स सोसायटी एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। इस बार विवाद सिक्योरिटी गार्ड्स के वेतन भुगतान को लेकर है, जिसके चलते गार्ड्स ने परिसर में ही धरना शुरू कर दिया है। एओए अध्यक्ष गौरव विरमानी और सचिव ऋतु चौधरी ने इस संकट के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं।

​गार्ड्स का परिसर में धरना

​सोसायटी की सुरक्षा में तैनात लगभग 60 गार्ड्स ने वेतन न मिलने पर काम रोककर धरना प्रदर्शन किया। गार्ड्स का आरोप है कि उन्हें पिछले दो महीने से सैलरी नहीं मिली है, जिससे उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। सिक्योरिटी एजेंसी का कहना है कि एओए की ओर से भुगतान न मिलने के कारण वे वेतन देने में असमर्थ हैं।

रिवर हाइट्स सोसायटी में धरने पर बैठे गार्ड्स

अध्यक्ष गौरव विरमानी के आरोप

एओए अध्यक्ष गौरव विरमानी ने भुगतान रुकने का सारा ठीकरा सचिव रितु चौधरी पर फोड़ा है। विरमानी का दावा है कि उन्होंने चेक पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, लेकिन सचिव की 'हठधर्मिता' के कारण भुगतान अटका हुआ है। उनके अनुसार, एजेंसी का करीब 45 लाख रुपये बकाया है और सचिव की मनमर्जी से हर महीने का लगभग 11.25 लाख रुपये का भुगतान प्रभावित हो रहा है। अब गार्डों के धरने पर बैठने के बाद सोसायटी की सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया है। 
अध्यक्ष गौरव विरमानी एवं सचिव रितु चौधरी

सचिव ऋतु चौधरी का पलटवार

सचिव रितु चौधरी ने अध्यक्ष के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए इसे उन्हें बदनाम करने की साजिश करार दिया। उनका कहना है कि कल ही 10 लाख रुपये (5 लाख आरटीजीएस और 5 लाख चेक) का भुगतान किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अध्यक्ष ने ही एजेंसी को डराया है कि कार्यकाल खत्म होने के बाद भुगतान नहीं मिलेगा, जिसके कारण यह कृत्रिम विवाद खड़ा किया गया है। अध्यक्ष और उनके गुर्गों ने ही गार्डों को उकसाकर धरने पर बिठाया है। उन्होंने अध्यक्ष पर और भी कई गंभीर आरोप लगाए हैं।

​अनुबंध और पुराने विवाद

​सचिव रितु चौधरी के अनुसार, एजेंसी के साथ करार था कि एक महीने का पेमेंट रोककर नियमित भुगतान होगा, जिसका पालन किया जा रहा है। गौरतलब है कि रिवर हाइट्स और विवादों का पुराना नाता रहा है। नंदग्राम थाने में एओए के आंतरिक झगड़ों और पूर्व पदाधिकारियों से जुड़े कई मुकदमे पहले से ही दर्ज हैं, जिससे सोसायटी की छवि लगातार धूमिल हो रही है।

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