फॉर्च्यून रेजिडेंसी: लेटरबाजी के फेर में फंसे AOA चुनाव, 7 महीने बाद भी तारीखों का खेल जारी


विभु मिश्रा 
गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन की पॉश सोसायटी 'फॉर्च्यून रेजिडेंसी' इन दिनों चुनावी अखाड़ा बनी हुई है। 924 फ्लैट्स और 625 मेंबर्स वाली इस सोसायटी में 20 जुलाई 2025 को ही एओए (AOA) का कार्यकाल खत्म हो चुका है, लेकिन 7 महीने बीत जाने के बाद भी नए चुनाव नहीं हो पाए हैं। आलम यह है कि सोसायटी और डिप्टी रजिस्ट्रार (DR) ऑफिस के बीच सिर्फ चिट्ठी-पत्री का दौर चल रहा है, जिससे चुनाव लगातार लटक रहे हैं।

​समय पर दी सूचना: सचिव

​सोसायटी की एओए के सचिव नीरज विजयवर्गीय का कहना है कि उन्होंने कार्यकाल खत्म होने से पहले ही 9 जुलाई 2025 को डीआर कार्यालय को पत्र लिखकर चुनाव पर्यवेक्षक नियुक्त करने की मांग की थी। नियमों के तहत कार्यकाल 20 जुलाई 2025 तक था, लेकिन विभाग की ओर से जवाब देरी से आया। एओए का दावा है कि उन्होंने समय रहते ही जनरल बॉडी मीटिंग (GBM) बुलाकर चुनाव की तैयारी शुरू कर दी थी।

​बार-बार टलती तारीखें

​6 अगस्त को चुनाव अधिकारी की नियुक्ति तो हुई, लेकिन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। पहले 11 नवंबर 2025 और फिर 19 दिसंबर 2025 को चुनाव कार्यक्रम घोषित किया गया। इसके बाद 16 नवंबर और फिर 3 जनवरी की तारीखें तय हुईं, लेकिन कभी विवादों के कारण तो कभी नए आदेशों के चलते चुनाव टाल दिए गए। सचिव का आरोप है कि विभाग ने जानबूझकर एओए को कालातीत (टाइम-बार्ड) करने की कोशिश की है।

दो बार घोषित हुई चुनाव तिथि

नए-नए सरकारी बहाने

​चुनाव टलने के पीछे हर बार नए कारण सामने आए। कभी फोटोयुक्त वोटर आईडी कार्ड बनाने का आदेश दिया गया, तो कभी डिफॉल्टर लिस्ट की मांग की गई। सचिव का कहना है कि पारदर्शिता के लिए फोटो वाले वोटर कार्ड की प्रक्रिया अपनाई गई जिसमें वक्त लगा, लेकिन सिटी मजिस्ट्रेट और रजिस्ट्रार कार्यालय द्वारा बार-बार मांगे जा रहे दस्तावेज और नए निर्देश चुनाव की राह में रोड़ा बन रहे हैं।


आपसी वर्चस्व की जंग

​सोसायटी के भीतर की राजनीति इस मामले में भारी पड़ रही है। एओए पदाधिकारियों का आरोप है कि विपक्षियों और विभाग की मिलीभगत के कारण चुनाव में देरी हो रही है। दूसरी तरफ, विभाग पुरानी एओए के दावों पर सवाल उठा रहा है। फिलहाल, पूरी सोसायटी इस 'लेटर के खेल' में उलझी हुई है और निवासी नई एओए का इंतजार कर रहे हैं।

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