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गाजियाबाद। इंदिरापुरम स्थित कृष्णा अपरा गार्डन्स में 22 फरवरी 2026 को प्रस्तावित वार्षिक आम बैठक से पहले सोसायटी की सियासत फिर उफान पर है। 8 फरवरी को जारी नोटिस में बैठक का विस्तृत एजेंडा तय किया गया है, लेकिन निवासियों का एक वर्ग अब न केवल प्रस्तावित एजीएम, बल्कि 31 अगस्त 2025 के बाद हुई बैठकों और निर्णयों की वैधता पर भी सवाल खड़ा कर रहा है। पहले करोड़ों रुपये के व्यय को लेकर उठी आपत्तियों के बाद अब पूरा विवाद बैठकों की कानूनी स्थिति पर केंद्रित हो गया है।
एजीएम की घोषणा, लेकिन सवाल बाकी
जारी नोटिस के अनुसार बैठक 22 फरवरी को शाम सात बजे क्लब हाउस में होगी। एजेंडा में अब तक किए गए कार्यों की प्रगति रिपोर्ट, वित्तीय वर्ष 2024-25 की ऑडिटेड बैलेंस शीट की प्रस्तुति और अनुमोदन, सोसायटी में लंबित कानूनी मामलों की जानकारी, वैधानिक ऑडिटर की नियुक्ति और ऑडिट फीस तय करना, साथ ही वार्षिक आम चुनावों की घोषणा और चुनाव अधिकारियों की नियुक्ति शामिल है। कागजों पर यह एक नियमित प्रक्रिया है, लेकिन निवासियों का कहना है कि असली मुद्दा यह है कि जिनके अधिकार पर प्रश्नचिह्न है, वे ही बैठक बुला रहे हैं।
कार्यकाल के बाद हुई बैठकों पर आपत्ति
निवासियों के मुताबिक वर्तमान एओए ने 1 सितंबर 2024 को कार्यभार संभाला था और उसका वैधानिक कार्यकाल 31 अगस्त 2025 को समाप्त हो गया। उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश अपार्टमेंट अधिनियम 2010 और मॉडल उपविधियों के तहत कार्यकाल एक वर्ष का है और स्वतः विस्तार का कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे में 31 अगस्त 2025 के बाद बुलाई गई बैठकों, पारित प्रस्तावों और लिए गए निर्णयों की वैधता पर सीधा सवाल खड़ा होता है। 7 सितंबर 2025 की कथित ईजीएम का भी उल्लेख किया जा रहा है, जिसके बाद हुए निर्णयों और अनुबंधों का पूरा ब्योरा सार्वजनिक न किए जाने पर आपत्ति जताई गई है।
करोड़ों के फैसले की पृष्ठभूमि
सोसायटी में इससे पहले 5.08 करोड़ रुपये के व्यय की स्वीकृति को लेकर विवाद सामने आ चुका है। 9 सितंबर 2025 के एक पत्र के आधार पर स्वीकृत इस व्यय को लेकर निवासियों का कहना है कि यदि उस समय तक समिति का कार्यकाल समाप्त हो चुका था तो उस अवधि में लिए गए वित्तीय निर्णयों और अनुबंधों की वैधता स्वतः संदेह के घेरे में आ जाती है। यही कारण है कि अब एजीएम से पहले यह मांग उठ रही है कि 31 अगस्त 2025 के बाद हुई सभी बैठकों, प्रस्तावों और वित्तीय निर्णयों को निवासियों के समक्ष स्पष्ट रूप से रखा जाए और यदि आवश्यक हो तो अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जाए।
एजीएम में टकराव के आसार
निवासियों का कहना है कि प्रस्तावित एजीएम में केवल प्रगति रिपोर्ट और ऑडिटेड बैलेंस शीट तक चर्चा सीमित न रहे, बल्कि कार्यकाल की समाप्ति के बाद हुई बैठकों की वैधता, चुनाव में देरी के कारण और उस अवधि में लिए गए निर्णयों पर खुली बहस हो। उनका तर्क है कि यदि कानूनी स्थिति स्पष्ट नहीं की गई तो भविष्य में किसी भी प्रस्ताव या अनुबंध पर नया विवाद खड़ा हो सकता है। इस पूरे विवाद पर एओए अध्यक्ष तेजिंदर सिंह से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। उनका पक्ष प्राप्त होते ही प्रकाशित किया जाएगा।
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