फर्जी पासपोर्ट मामले में बड़ी कार्रवाई, भोजपुर थाना प्रभारी समेत आठ दरोगा लाइन हाजिर


विभु मिश्रा 
गाजियाबाद। फर्जी पासपोर्ट मामले में पुलिस महकमे में सख्त कार्रवाई की गई है। थाने के भीतर से ही पासपोर्ट सत्यापन में गड़बड़ी सामने आने के बाद डीसीपी देहात ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए थाना प्रभारी समेत आठ दरोगाओं को लाइन हाजिर किया है।

मुंशी पर मुकदमा

डीसीपी देहात सुरेंद्रनाथ तिवारी के मुताबिक भोजपुर थाने में तैनात मुंशी दीपक कुमार को फर्जी पासपोर्ट मामले में नामजद आरोपी बनाया गया है। जांच में सामने आया है कि मुंशी ने पासपोर्ट वेरिफिकेशन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं कीं। आरोप है कि थाने में बैठकर ही नियमों को दरकिनार करते हुए कई संदिग्ध पासपोर्ट सत्यापन किए गए, जिससे पूरा रैकेट सक्रिय हो सका।
भोजपुर थाना प्रभारी सचिन चौधरी

आईडी का दुरुपयोग

डीसीपी देहात ने बताया कि पासपोर्ट सत्यापन में लापरवाही बरतने वाले आठ उपनिरीक्षकों को लाइन हाजिर किया गया है। आरोप है कि मुंशी दीपक कुमार ने इन दरोगाओं की लॉग-इन आईडी का इस्तेमाल कर पासपोर्ट वेरिफिकेशन निपटा दिए। इस गंभीर लापरवाही के चलते भोजपुर थाना प्रभारी सचिन बालियान को भी लाइन हाजिर कर दिया गया है।

कई राज्यों तक नेटवर्क

पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि फर्जी पासपोर्ट बनाने वाला गिरोह का नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ था। यह गिरोह अपराधियों, वांछितों और पैरोल जंप करने वालों के लिए फर्जी पासपोर्ट तैयार कर उन्हें विदेश भेजने में मदद करता था। इसके लिए आधार कार्ड, वोटर आईडी और पैन कार्ड जैसे दस्तावेज भी जाली बनाए जाते थे। डीसीपी के अनुसार एक फर्जी पासपोर्ट के बदले एक से दो लाख रुपये तक वसूले जाते थे। 
फर्जी पासपोर्ट में गिरफ्तार आरोपी

30 से ज्यादा मोबाइल नंबर रडार पर

जांच में सामने आया कि सत्यापन के नाम पर पुलिसकर्मियों को करीब 15 हजार और डाक विभाग के कर्मचारियों को दो से पांच हजार रुपये प्रति पासपोर्ट दिए जाते थे। मामले की जांच एसीपी मसूरी लिपि नगायच को सौंपी गई है। पुलिस 30 से ज्यादा मोबाइल नंबरों की जांच कर रही है और चार टीमें 22 फरार आरोपियों की तलाश में जुटी हैं।

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