राजनगर एक्सटेंशन: गौर कैसकेड्स में एक्ट ठेंगे पर, सदस्यता रद्द पर पद पर अभी भी काबिज पूर्व सचिव! बिना चुनाव लड़े ही अध्यक्ष पद पर भी हो गई ताजपोशी

विभु मिश्रा 
गाजियाबाद। सोसायटियों में उत्तर प्रदेश अपार्टमेंट एक्ट की किस तरह धज्जियां उड़ाई जा रही हैं इसका एक और जीता जागता सबूत है राजनगर एक्सटेंशन स्थित गौर कैसकेड्स सोसायटी। यहां की वर्तमान एओए की बागडोर ऐसे लोग संभाल रहे हैं जिनमें एक तो चुनाव तक नहीं लड़ा और दूसरे की सदस्यता नियमानुसार स्वत: ही समाप्त हो चुकी है। जागरूक बोर्ड सदस्यों ने इस मामले की लिखित शिकायत डिप्टी रजिस्ट्रार वैभव कुमार से की है। डीआर ने भी इस मामले में सख्त कदम उठाने की बात कही है। 

सचिव पर गंभीर आरोप

अनुज कुमार राठी
जानकारी के मुताबिक सोसायटी के वर्तमान बोर्ड सदस्यों ने पूर्व सचिव पुनीत गोयल पर फर्जी ढंग से जबरन सचिव बने रहने के गंभीर आरोप लगाए हैं। इसकी शिकायत इन्होंने डिप्टी रजिस्ट्रार से भी की है। वर्तमान बोर्ड सदस्य और पूर्व एओए अध्यक्ष अनुज राठी ने बताया कि एओए सचिव पुनीत गोयल ने अपना फ्लैट नंबर एच-358 को 21 नवंबर 2025 को बेच दिया था। एक्ट के अनुसार सोसायटी एओए का कोई पदाधिकारी यदि अपना वो फ्लैट बेच देता जिसका ओनर होने के आधार पर वो चुनाव लड़ा, जीता और फिर एओए पदाधिकारी बना, तो ऐसे में उसकी सोसायटी की सदस्यता स्वत: ही समाप्त हो जाती है। जिसके बाद वो एओए पदाधिकारी भी नहीं रह सकता। लेकिन वो अभी तक सचिव बने हुए हैं।

नियम विरुद्ध बने 'सिग्नेचर अथॉरिटी'

बोर्ड सदस्य निधि शर्मा और इति सिंघल
बोर्ड सदस्य निधि शर्मा का आरोप है कि हैरानी की बात यह है कि सदस्यता समाप्त होने के बावजूद वह सोसायटी के बैंक अकाउंट पर 'सिग्नेचर अथॉरिटी' बने हैं। एओए के फंड पर पैसों पर उनका कंट्रोल बरकरार है। वर्तमान बोर्ड सदस्य इस पर सवाल उठा रहे हैं कि जिस व्यक्ति की सदस्यता ही नहीं रही, वह फंड का उपयोग कैसे कर सकता है? बोर्ड सदस्य इति सिंघल ने सचिव पर एओए फंड के दुरुपयोग करने और उनमें भरी अनियमितताओं की आशंका जताई हुए डिप्टी रजिस्ट्रार से इसकी जांच कराने की भी माँग की है।

बिना चुनाव लड़े बनाया अध्यक्ष

संजीव मालिक
विवाद यहां सिर्फ सचिव को लेकर नहीं है। वर्तमान अध्यक्ष को लेकर भी यहां विवाद है। बोर्ड सदस्य संजीव मलिक के अनुसार चुनाव में नामित होकर आये अध्यक्ष चंद्रभान शर्मा ने सचिव पुनीत गोयल और कोषाध्यक्ष अखिल अग्रवाल पर गंभीर आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया था। एक अन्य बोर्ड सदस्य भी पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं। ऐसे में सचिव ने बिना सभी बोर्ड सदस्यों को भरोसे में लिये एक ऐसे शख्स को अध्यक्ष बना दिया जो चुनाव तक नहीं लड़ा। इसका विरोध सोसायटी के रेजिडेंट्स भी कर चुके हैं।

सचिव पुनीत गोयल की सफाई

 पुनीत गोयल
अपने ऊपर लगे आरोपों पर सचिव पुनीत गोयल ने सफाई दी है। उनका कहना है कि जानकारी के अभाव में ऐसा हुआ है। लेकिन उनके विरोधी इसे जबरन इशू बना रहे हैं। वो सोसायटी छोड़कर नहीं गए हैं। इसीलिए वो सचिव पद की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि 7 फरवरी को हुई बोर्ड बैठक में इस पर फैसला लेते हुए उनकी सचिव के पद पर नियुक्ति को बरकरार रखा है। और इसकी जानकारी डिप्टी रजिस्ट्रार को भी दे दी है। लेकिन यहां सवाल यह उठता है कि जब वो अभी सोसायटी के मेंबर ही नहीं हैं और नए पते पर चुनाव ही नहीं लड़े हैं तो दोबारा वो सचिव कैसे बन सकते हैं? 

होगी सख्त कार्रवाई: डिप्टी रजिस्ट्रार 

डिप्टी रजिस्ट्रार वैभव कुमार
इस प्रकरण में डिप्टी रजिस्ट्रार वैभव कुमार का कहना है कि ये गंभीर मामला है। इसमें एक्ट में कोई क्लियर गाइडलाइन नहीं है लेकिन ये जरूर नियम है कि एओए का पदाधिकारी वही बन सकता है जो सोसायटी का सदस्य हो और चुनाव लड़कर जीता हो। उनका कहना है कि एओए चुनाव व्यक्ति विशेष का चुनाव नहीं अपार्टमेंट या फ्लैट ऑनर का चुनाव होता है। उन्होंने कहा कि इस मामले में गंभीर और सख्त कार्रवाई की जाएगी। 

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