चुनाव कराने से बच रहे गुलमोहर गार्डन के कालातीत अध्यक्ष-सचिव? जानना चाहेंगे कारण तो पढ़िए पूरी खबर.....

विभु मिश्रा
गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन स्थित गुलमोहर गार्डन सोसायटी में एओए (अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन) का कालातीत कार्यकाल अब बड़े विवाद की वजह बन गया है। एक ओर समय पर चुनाव न कराने के आरोप हैं, दूसरी ओर लगभग 80 लाख की देनदारी और वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल। सक्रिय निवासी सीमा गिल ने पदाधिकारियों पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया रोकने, जरूरी दस्तावेज न देने और निवासियों के अधिकारों की अनदेखी करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।

लटकाये चुनाव, दबाए दस्तावेज 

सीमा गिल का कहना है कि एओए का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, इसके बावजूद नई कार्यकारिणी के गठन के लिए समयबद्ध चुनाव नहीं कराए गए। उनका आरोप है कि कालातीत अध्यक्ष और सचिव चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा रहे। यदि समय रहते नियमों के तहत पहल की जाती, तो सोसायटी को इस स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।
चुनाव अधिकारी डॉ. राजेश तेवतिया ने भी पुष्टि की कि अध्यक्ष और सचिव से कई बार आवश्यक दस्तावेज मांगे गए हैं, लेकिन अब तक उपलब्ध नहीं कराए गए। उन्होंने बताया कि एसआईआर ड्यूटी में व्यस्तता के कारण थोड़ी देरी हुई, पर यदि जल्द दस्तावेज नहीं मिले तो एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

 80 लाख की देनदारी का आरोप

सीमा गिल
सीमा गिल की शिकायत के मुताबिक विवाद का दूसरा बड़ा पहलू वित्तीय स्थिति है। दो कालातीत कार्यकालों के दौरान, जबकि अधिकांश निवासियों ने नियमित मेंटेनेंस शुल्क जमा किया, सोसायटी पर करीब 80 लाख की देनदारी खड़ी हो गई। इसमें से लगभग 60 लाख केवल सिक्योरिटी एजेंसी का बकाया बताया जा रहा है। नियमित आय के बावजूद इतनी बड़ी देनदारी वित्तीय कुप्रबंधन की ओर इशारा करती है और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है।

ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं?

सीमा गिल ने आरोप लगाया कि वित्तीय ऑडिट तो कराया गया, लेकिन उसकी रिपोर्ट आज तक सार्वजनिक नहीं की गई। उनका कहना है कि जब किसी सोसायटी में ऑडिट होता है, तो उसकी रिपोर्ट सभी सदस्यों के सामने रखी जानी चाहिए। रिपोर्ट सार्वजनिक न होने से निवासियों में शंकाएं बढ़ रही हैं।

एडमिन मोड पर डाला वॉटसएप ग्रुप

आरोप है कि न नियमित आम सभाएं हुईं और न आय-व्यय का स्पष्ट ब्योरा साझा किया गया। सवाल उठाने वाले निवासियों को नजरअंदाज किया गया और ऑफिशियल ग्रुप को महीनों तक एडमिन मोड पर रखा गया। इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया कुछ लोगों तक सीमित हो गई और जवाबदेही कमजोर पड़ गई।

प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल

हालांकि मुख्य आरोप एओए पदाधिकारियों पर हैं, लेकिन सीमा गिल ने डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालय की भूमिका पर भी सवाल उठाया है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कड़ाई बरती जाती तो चुनाव प्रक्रिया लंबित नहीं रहती। उन्होंने उच्च स्तर पर शिकायत भेजकर स्पष्ट और समयबद्ध कार्रवाई की मांग की है। इस मामले में जब सोसायटी सचिव रवि ओझा को फोन किया गया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।

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