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गाजियाबाद। इंदिरापुरम स्थित कृष्णा अपरा गार्डन्स सोसायटी में पेंटिंग, रिपेयर, स्विमिंग पूल मरम्मत और अन्य मेंटेनेंस कार्यों के लिए दिए गए लगभग 5.08 करोड़ रुपये के ठेके को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। सोसायटी के कई रेजिडेंट्स ने आरोप लगाया है कि यह ठेका पारदर्शी प्रक्रिया के बिना एक निजी कंपनी को दे दिया गया, जिससे एओए (अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन) की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
ठेकेदार कंपनी पर सवाल
रेजिडेंट्स के अनुसार एओए ने जिन कार्यों के लिए ठेका दिया है, वह डॉल्फिन ग्लोबल प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी को दिया गया है। सूत्रों का कहना है कि यह कंपनी ग्रेटर नोएडा की बताई जा रही है और इसका जीएसटी पंजीकरण भी वर्ष 2023 में ही कराया गया है। कुछ निवासियों का कहना है कि अपेक्षाकृत नई और सीमित प्रोफाइल वाली कंपनी को सीधे करोड़ों रुपये का बड़ा काम दिए जाने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
टेंडर प्रक्रिया पर संदेह
रेजिडेंट्स का आरोप है कि यह ठेका उस समय दिया गया जब एओए का कार्यकाल पहले ही समाप्त हो चुका था। ऐसे में इस निर्णय की वैधता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
निवासियों का कहना है कि टेंडर प्रक्रिया को सार्वजनिक नहीं किया गया और न ही सोसायटी के सदस्यों से कोई राय ली गई। उनका आरोप है कि टेंडर से जुड़े दस्तावेज, वर्क ऑर्डर और कंपनी की प्रोफाइल की जानकारी मांगने पर भी एओए की ओर से कोई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है।
‘संबंधों के आधार पर ठेका देने’ का आरोप
सोसायटी के कुछ सूत्रों का यह भी दावा है कि जिस कंपनी को ठेका दिया गया है, उसका संबंध एओए के एक पदाधिकारी के पारिवारिक परिचित से बताया जा रहा है। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन इस वजह से निवासियों के बीच संदेह और बढ़ गया है।
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| रिपेयरिंग के नाम पर बदहाल पड़ा स्विमिंग पूल |
डिप्टी रजिस्ट्रार से शिकायत की तैयारी
मामले को लेकर कई रेजिडेंट्स अब डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालय में शिकायत दर्ज कराने की तैयारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि सोसायटी में बड़े वित्तीय निर्णय पारदर्शिता के साथ होने चाहिए और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए। निवासियों ने यह भी संकेत दिया है कि मामले में वित्तीय ऑडिट की मांग करेंगे। साथ ही एओए के कार्यकाल और उसके विस्तार को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
एओए अध्यक्ष का पक्ष
वहीं एओए के कार्यवाहक अध्यक्ष तेजिंदर सिंह ने सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि ठेका देने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रही और कई कंपनियों ने टेंडर में भाग लिया था।
उनके अनुसार सभी बिड्स के मूल्यांकन के बाद ही डॉल्फिन ग्लोबल प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को काम दिया गया। हालांकि ठेके से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराने के सवाल पर उन्होंने साफ इनकार किया।
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स्थान:
India
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