कृष्णा अपरा गार्डन्स की अवैध एजीएम में पास हुए फैसलों पर घमासान: एओए के खिलाफ रेजिडेंट्स पहुंचे डीआर ऑफिस, डीएम से भी शिकायत

विभु मिश्रा 
गाजियाबाद। इंदिरापुरम स्थित कृष्णा अपरा गार्डन्स सोसाइटी में हुई हालिया एजीएम अब बड़े विवाद की वजह बन गई है। बैठक में लिए गए फैसलों की वैधता पर सवाल उठाते हुए रेजिडेंट्स ने एओए पर नियमों की अनदेखी, मनमानी और यूपी अपार्टमेंट एक्ट के उल्लंघन के आरोप लगाए हैं। मामला अब डिप्टी रजिस्ट्रार और जिला प्रशासन तक पहुंच चुका है।

एजीएम में क्या-क्या फैसले हुए

बीती 7 मार्च को यूपी अपार्टमेंट एक्ट को ठेंगा दिखाते हुए आयोजित हुई अवैध एजीएम में कई अहम प्रस्ताव पारित किए गए। इसमें:-
  • वर्ष 2024-25 की ऑडिटेड बैलेंस शीट को हाथ उठाकर मंजूरी दी गई। साथ ही सोसाइटी के चल रहे सिविल, इलेक्ट्रिक और फायर सिस्टम से जुड़े कार्यों की प्रगति रिपोर्ट पेश की गई।
  • बैठक में स्टैच्यूटरी ऑडिटर के रूप में एसएसएसआर एंड कंपनी एलएलपी की नियुक्ति 35 हजार रुपए फीस पर और इंटरनल ऑडिटर के तौर पर मेवेन ईजी4टैक्स प्राइवेट लिमिटेड को 12 हजार रुपए प्रतिमाह पर नियुक्त करने का निर्णय भी लिया गया।
  • सबसे अहम फैसला आगामी चुनाव को लेकर हुआ, जिसमें 12 अप्रैल 2026 को चुनाव कराने की घोषणा की गई। इसके लिए चार चुनाव अधिकारियों आर.आर. शर्मा, पी.के. गुप्ता, ए.के. अग्निहोत्री और रजनीश सिन्हा की नियुक्ति को मंजूरी दी गई, जबकि एक और अधिकारी बाद में जोड़ने की बात कही गई। हालांकि बताया जा रहा है कि नियुक्त चुनाव अधिकारियों में से एक ने इससे मना कर दिया है। 

कोरम और वैधता पर उठे सवाल

रेजिडेंट्स का आरोप है कि एजीएम में केवल 7 सदस्य मौजूद थे, जबकि आरडब्ल्यूए में कुल 9 सक्रिय सदस्य हैं। ऐसे में कोरम पूरा हुआ या नहीं, इस पर ही सवाल खड़े हो गए हैं। बावजूद इसके, इतने महत्वपूर्ण निर्णय ले लिए गए।

कार्यकाल खत्म, फिर भी फैसले जारी

निवासियों का कहना है कि एओए का कार्यकाल पहले ही समाप्त हो चुका है। खुद एओए द्वारा 1 नवंबर 2025 को डिप्टी रजिस्ट्रार को भेजे गए पत्र में चुनाव न करा पाने और कार्यकाल बढ़ाने की बात स्वीकार की गई थी, जबकि यूपी अपार्टमेंट एक्ट में एक्सटेंशन का कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे में रेजिडेंट्स एजीएम और उसमें लिए गए सभी फैसलों को अवैध बता रहे हैं।

वोटिंग प्रक्रिया भी विवादों में

एजीएम में कई ऐसे लोगों के शामिल होने का आरोप है जो न तो फर्स्ट ओनर थे और न ही को-ओनर, फिर भी उन्होंने प्रस्तावों पर हाथ उठाकर मंजूरी दी। जबकि पूर्व के निर्देशों के अनुसार केवल फर्स्ट ओनर को ही वोटिंग का अधिकार है। इससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

करोड़ों के ठेकों पर भी संदेह

रेजिडेंट्स ने डॉल्फिन ग्लोबल कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को दिए गए 5 करोड़ से अधिक के कार्यों पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अपेक्षाकृत नई कंपनी को इतने बड़े कॉन्ट्रैक्ट देने में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा का पालन हुआ या नहीं, इसकी जांच जरूरी है। रेजिडेंट्स का कहना है कि इस मामले में वो जल्द ही जीएसटी अधिकारियों से मिलकर उनसे इस ठेके और इससे जुड़े लोगों की जांच की अपील भी करेंगे। 

प्रशासन तक पहुंची शिकायत

रेजिडेंट्स ने डिप्टी रजिस्ट्रार और डीएम गाजियाबाद को पत्र भेजकर मांग की है कि एजीएम को अवैध घोषित किया जाए, हालिया फैसलों को रद्द किया जाए, वित्तीय लेनदेन की जांच कराई जाए और निष्पक्ष चुनाव कराए जाएं।

बढ़ता अविश्वास, गरमाता माहौल

लगातार उठ रहे सवालों और प्रबंधन की चुप्पी ने सोसाइटी में असंतोष बढ़ा दिया है। रेजिडेंट्स का कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह विवाद और गहराएगा, जिससे हाई-राइज सोसाइटी प्रबंधन की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ेगा।

अध्यक्ष ने काटी कन्नी

इस मामले में जब एओए अध्यक्ष तेजिंदर सिंह से उनका पक्ष जाना चाहा तो उन्होंने शहर से बाहर होने का हवाला देते हुए सवालों से कन्नी काट ली।

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