गौर कैसकेड्स एओए विवाद की गेंद अब डीआर के पाले में, एक हफ्ते में होगा फैसला, टिकी सबकी नजरें...

विभु मिश्रा 
गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन स्थित गौर कैसकेड्स सोसाइटी में एओए का विवाद अब निर्णायक दौर में पहुंच गया है। डिप्टी रजिस्ट्रार वैभव कुमार के समक्ष हुई सुनवाई में दोनों पक्षों ने अपने-अपने दावे और आरोप रखे। सुनवाई के बाद डीआर ने साफ कर दिया कि एक हफ्ते के भीतर निर्णय दिया जाएगा, जो तय करेगा कि मौजूदा एओए व्यवस्था कायम रहेगी या उसमें बड़ा बदलाव होगा।

ये है विवाद

दरअसल पूरा विवाद एओए सचिव पुनीत गोयल की सदस्यता से जुड़ा है। एओए बोर्ड के चार सदस्यों अनुज राठी, संजीव मालिक, इति सिंघल और निधि शर्मा ने पुनीत गोयल के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है। तमाम शिकायतों के बाद डीआर ने इस मामले के निपटारे के लिए दोनों पक्षों को साक्ष्य के साथ अपने समक्ष बुलाया था। यहां
शिकायतकर्ता बोर्ड सदस्यों ने साक्ष्यों के साथ दावा किया कि एओए सचिव पुनीत गोयल ने 21 नवंबर 2025 को अपना फ्लैट बेच दिया था। जिससे उनकी सदस्यता नियमानुसार खुद ही समाप्त हो गई।  उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बावजूद भी वह लगातार सदस्य, बोर्ड पदाधिकारी और निर्णय लेने की भूमिका में बने हैं। इस पर सवाल उठाया गया कि किस नियम के तहत वह सोसाइटी फंड का इस्तेमाल कर रहे हैं। डिप्टी रजिस्ट्रार ने इन बिंदुओं को गंभीरता से नोट किया।

हैंडओवर और आरोपों की बौछार

बोर्ड सदस्यों ने आरोप डीआर के समक्ष आरोप लगाया कि पुनीत गोयल ने अब तक सोसाइटी के दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड का हैंडओवर नहीं किए हैं। साथ ही पुनीत गोयल पर बोर्ड सदस्यों को एओए ऑफिस में प्रवेश तक से रोके जाने, मीटिंग्स के गलत मिनट्स जारी करने, कर्मचारियों के ग्रुप से हटाने और बुजुर्गों के साथ बदसलूकी जैसे आरोप भी लगाए गए। बैठक में डीआर के सामने महंगी परियोजनाओं के नाम पर निवासियों को गुमराह करने और नियमों के विरुद्ध मीटिंग्स कराने के मुद्दे भी उठे।

बोर्ड गठन पर गंभीर सवाल

अनुज राठी
बोर्ड सदस्य अनुज राठी ने बताया कि डीआर वैभव कुमार के सामने उनके द्वारा 11 मई 2025 के चुनाव के बाद टीम नवोदय के 6 सदस्यों द्वारा मनमाने तरीके से बोर्ड गठन और चंद्रभान शर्मा को अध्यक्ष बनाने का मामला भी उठाया गया। बाद में 28 जुलाई 2025 को चंद्रभान शर्मा ने अपने ही साथियों पर निजी लाभ के आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया था। इसके बावजूद उन्हीं लोगों द्वारा इस्तीफा स्वीकार कर बिना चुनाव एक अन्य व्यक्ति को अध्यक्ष बना दिया गया। इस पर भी डीआर ने आपत्ति को नोट किया। साथ ही यह भी बताया गया कि एक सदस्य के इस्तीफे के बाद बोर्ड की संख्या भी वैधानिक रूप से घट चुकी थी। उन्होंने मांग की कि 21 नवंबर 2025 के बाद लिए गए सभी निर्णय और वित्तीय मंजूरी रद्द की जाए, हैंडओवर कराया जाए, नियुक्तियां निरस्त हों और पूरे कार्यकाल का ऑडिट हो।

पुनीत गोयल का पक्ष

पुनीत गोयल
इस दौरान पुनीत गोयल ने अपने बचाव में कहा कि वह सोसाइटी छोड़कर नहीं गए। वह उसी सोसायटी में दूसरा फ्लैट खरीद कर रह रहे हैं। एक हफ्ते का जो समय लगा वो फ्लैट का नाम ट्रांसफर करने वी अन्य कानूनी कार्यवाही पूरी करने में लगा। उन्होंने शिकायतकर्ता बोर्ड सदस्यों पर आरोप लगाया कि वह खुद मीटिंग में नहीं आते। यूपी अपार्टमेंट एक्ट में कहीं भी कोई ऐसा नियम नहीं है जो उनकी सदस्यता स्वत ही समाप्त होने के बोर्ड सदस्यों के दावों को सही साबित करता हो। पुनीत गोयल ने बताया कि उन्होंने डीआर से बोर्ड सदस्यों के आरोपों का जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा है। क्योंकि उन्हें डीआर से बैठक के आदेश की जानकारी कुछ देरी से मिली। 

फैसले पर टिकी नजरें

डिप्टी रजिस्ट्रार वैभव कुमार 
अंत में डिप्टी रजिस्ट्रार वैभव कुमार ने एक सप्ताह का समय लेते हुए कहा कि वे सभी तथ्यों के आधार पर निर्णय देंगे। अब सोसाइटी के निवासियों की नजर इस फैसले पर टिकी है, जो तय करेगा कि वर्तमान एओए नेतृत्व बरकरार रहेगा या गौर कैसकेड्स में पूरी प्रशासनिक व्यवस्था बदल जाएगी।

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