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गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन की फॉर्च्यून रेजिडेंसी सोसाइटी में नई एओए (अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन) के गठन के साथ ही एक नया विवाद सामने आ गया है। इस बार मामला सोसाइटी परिसर में स्थित शिव दुर्गा मंदिर समिति की सदस्यता को लेकर गरमा गया है। कई रेजिडेंट्स ने नवनिर्वाचित एओए पर आरोप लगाया है कि मंदिर समिति की सदस्यता प्रक्रिया में पारदर्शिता को दरकिनार करते हुए अपने ही समर्थकों को सदस्य बना दिया गया है। इस संबंध में बड़ी संख्या में निवासियों ने हस्ताक्षरित लिखित शिकायत मंदिर समिति के सचिव राज भाटी को सौंपते हुए नाराजगी जताई है।
ये है पूरा मामला
रेजिडेंट्स का कहना है कि फॉर्च्यून रेजिडेंसी परिसर में स्थित शिव दुर्गा मंदिर सोसाइटी के सभी निवासियों की आस्था और श्रद्धा का केंद्र है। मंदिर का निर्माण, रखरखाव और संचालन प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सोसाइटी के निवासियों के सहयोग और योगदान से होता है। ऐसे में मंदिर से जुड़ी सदस्यता प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए, ताकि हर निवासी को इसमें भागीदारी का समान अवसर मिल सके।
सीमित सदस्यता पर रेजिडेंट्स नाराज
शिकायत में कहा गया है कि मंदिर समिति द्वारा सदस्यता प्रक्रिया को सीमित रखा गया है। जानकारी के अनुसार पिछले वर्ष केवल कुछ चुनिंदा लोगों को ही समिति का सदस्य बनाया गया, जिनमें अधिकांश वर्तमान समिति के समर्थक बताए जा रहे हैं। कई निवासियों ने आरोप लगाया कि बार-बार अनुरोध किए जाने के बावजूद मंदिर समिति की सदस्यता सभी इच्छुक रेजिडेंट्स के लिए नहीं खोली गई।
चुनाव की वैधता पर भी सवाल
रेजिडेंट्स का कहना है कि जब सदस्यता ही सीमित और पक्षपातपूर्ण तरीके से दी जाएगी तो भविष्य में होने वाले किसी भी चुनाव की निष्पक्षता और वैधता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि किसी सामुदायिक धार्मिक स्थल के संचालन में इस प्रकार की बंद सदस्यता व्यवस्था लोकतांत्रिक मूल्यों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत मानी जाती है।
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| मंदिर समिति सचिव राज भाटी को ज्ञापन देते रेजिडेंट्स |
प्रशासन तक पहुंची शिकायत
रेजिडेंट्स ने अपनी शिकायत में मांग की है कि मंदिर समिति की सदस्यता प्रक्रिया को फॉर्च्यून रेजिडेंसी के सभी इच्छुक निवासियों के लिए खुला और पारदर्शी बनाया जाए। साथ ही सदस्यता के नियम, पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और समयसीमा को लिखित रूप में सार्वजनिक किया जाए। निवासियों ने वर्तमान मंदिर समिति की पूरी सदस्य सूची सार्वजनिक करने और जब तक सभी इच्छुक लोगों को सदस्य बनने का अवसर नहीं दिया जाता, तब तक किसी भी प्रस्तावित चुनाव प्रक्रिया को स्थगित रखने की मांग की है। रेजिडेंट्स ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि इस मामले में जल्द उचित कार्रवाई नहीं हुई तो वे संबंधित प्रशासनिक और पंजीकरण प्राधिकरणों से हस्तक्षेप की मांग करेंगे। इस शिकायत की प्रतिलिपि डिप्टी रजिस्ट्रार सोसाइटीज और जिलाधिकारी गाजियाबाद को भी भेजी गई है।
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