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गौर कैस्केड्स में विवादों के बीच "जीबीएम" संपन्न, अप्रैल में चुनाव का एलान, डिप्टी रजिस्ट्रार की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
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विभु मिश्रा
गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन की गौर कैस्केड्स सोसाइटी में पिछले कई महीनों से जारी एओए विवाद अब एक नए मोड़ पर आ गया है। रविवार, 15 मार्च को सोसाइटी में जनरल बॉडी मीटिंग (GBM) आयोजित की गई, जिसमें चुनाव और बिल्डर से फंड वापस लेने जैसे बड़े फैसले हुए। हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया के दौरान डिप्टी रजिस्ट्रार वैभव कुमार के कार्यालय की भूमिका और उनकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।
डीआर कार्यालय की नीति पर सवाल
सोसाइटी के जागरूक निवासियों और निर्वाचित बोर्ड सदस्यों का आरोप है कि डिप्टी रजिस्ट्रार वैभव कुमार के कार्यालय को लंबे समय से साक्ष्यों के साथ शिकायतें दी जा रही थीं, लेकिन विभाग ने किसी भी शिकायत पर समय रहते ठोस निर्णय नहीं लिया। विभाग की इसी 'तारीख पर तारीख' और ढुलमुल कार्यशैली के कारण सोसाइटी में विवाद गहराता चला गया। जानकारों का कहना है कि अगर डीआर कार्यालय ने समय रहते नियमों का पालन सुनिश्चित कराया होता, तो सोसाइटी में आज जैसी प्रशासनिक अनिश्चितता की स्थिति पैदा नहीं होती।
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| डिप्टी रजिस्ट्रार वैभव कुमार |
विवाद के केंद्र में पुनीत गोयल
विवाद का मुख्य आधार पुनीत गोयल की सदस्यता है। रिकॉर्ड के अनुसार, पुनीत गोयल ने 21 नवंबर 2025 को अपना फ्लैट (H-358) बेच दिया था, जिसके बाद नियमानुसार उनकी एओए सदस्यता और बोर्ड पद स्वतः समाप्त हो जाना चाहिए था। बोर्ड के चार सदस्यों अनुज कुमार राठी, संजीव कुमार मलिक, निधि शर्मा और इति सिंघल ने इसी आधार पर इस पूरी बैठक और पुनीत गोयल के अधिकार क्षेत्र को 'अवैध' करार दिया। इन चारों बोर्ड सदस्यों ने नियमों का हवाला देते हुए बैठक का पूर्ण बहिष्कार किया और इसमें शामिल नहीं हुए।
पुनीत गोयल ने आरोपों को झुठलाया
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| पुनीत गोयल |
दूसरी ओर, पुनीत गोयल ने बैठक को शांतिपूर्वक संपन्न बताते हुए कहा कि बहुमत के साथ सोसाइटी के हित में कई बड़े निर्णय लिए गए हैं। पुनीत गोयल के अनुसार सोसाइटी में जारी विवादों को खत्म करने और लोकतांत्रिक व्यवस्था को बहाल करने के लिए अप्रैल 2026 में एओए के नए चुनाव कराने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा, बिल्डर के पास जमा सोसाइटी के करोड़ों रुपये के IFMS फंड को वापस लेने के लिए बिल्डर के खिलाफ कानूनी लड़ाई का बिगुल भी फूंक दिया गया है। उन्होंने बोर्ड सदस्यों द्वारा अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को भी गलत बताते हुए कहा कि वो कभी सोसायटी छोड़कर नहीं गए। वो इसके आज भी सदस्य हैं।
शासन तक ले जाएंगे प्रकरण: अनुज राठी
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| अनुज राठी |
पूरे प्रकरण पर कड़ा रुख अपनाते हुए पूर्व एओए अध्यक्ष अनुज कुमार राठी ने डीआर कार्यालय को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि डिप्टी रजिस्ट्रार वैभव कुमार के कार्यालय की लगातार अनदेखी और शिकायतों पर कार्रवाई न करने का ही नतीजा है कि आज नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। हमने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि एक गैर-सदस्य द्वारा बुलाई गई बैठक असंवैधानिक है, इसलिए हम चारों निर्वाचित बोर्ड सदस्य इसमें शामिल नहीं हुए। प्रशासन की चुप्पी ने पुनीत गोयल को यह अवसर दिया कि वे सदस्यता खत्म होने के बाद भी पद पर बने रहें और मनमाने निर्णय लें। हम इस मामले को अब शासन स्तर पर उठाएंगे।
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