क्लासिक रेजिडेंसी चुनाव घेरे में, देशमणि शर्मा की कुर्सी पर कानूनी संकट, नतीजे रद्द होने की आशंका

विभु मिश्रा 
गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन की क्लासिक रेजिडेंसी में एओए चुनाव के बाद बनी नई सत्ता अब कानूनी संकट में घिरती नजर आ रही है। तय समयसीमा से करीब पौने दो महीने की देरी से कराए गए इन चुनावों पर सवाल उठने लगे हैं और मामला डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालय तक पहुंच गया है। ऐसे में भले ही देशमणि शर्मा अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंच गए हों, लेकिन अभी इस पर सरकारी मुहर नहीं लगी है और पूरे चुनाव के साथ उनकी कुर्सी भी खतरे में आ गई है।

संकट का कारण

एओए का कार्यकाल फरवरी में समाप्त हो चुका था, लेकिन चुनाव अप्रैल में कराए गए। यूपी अपार्टमेंट एक्ट के तहत कार्यकाल खत्म होने के एक हफ्ते से दस दिन के भीतर चुनाव कराना जरूरी होता है, जबकि यहां करीब डेढ़ महीने से ज्यादा की देरी हुई, जो अब विवाद की मुख्य वजह बन गई है।

दलील बनी विवाद की जड़

एओए की ओर से यह कहा गया कि फरवरी में ही डिप्टी रजिस्ट्रार को सूचना देकर चुनाव खुद कराने का फैसला लिया गया था, लेकिन बाद में बच्चों की परीक्षाओं का हवाला देकर चुनाव टाल दिए गए। अब यही फैसला उल्टा पड़ता दिख रहा है और पूरी प्रक्रिया की वैधानिकता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
देशमणि शर्मा और उनकी विजयी टीम

देशमणि शर्मा पर सीधा असर

चुनाव में टीम लक्ष्य के देशमणि शर्मा (79.19%), हरिओम भाटी (77.80%), मोहित बाना (72.88%), वरुण झरकारिया (69.44%), डॉ. पंकज कुमार (68.84%) और अतुल कुमार जैन (66.84%) ने 6 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया, जबकि विशाल वर्मा (84.51%), विकास चौधरी (78.44%), मनोज कुमार कसाना (70.72%) और मनोज कुमार यादव (69.13%) दूसरे पैनल से जीते। लेकिन अब चुनाव पर उठे सवालों के बीच सबसे बड़ा खतरा देशमणि शर्मा पर है, क्योंकि यदि चुनाव निरस्त होते हैं तो उनकी अध्यक्ष की कुर्सी और पूरा बहुमत दोनों एक झटके में खत्म हो सकते हैं।
डिप्टी रजिस्ट्रार वैभव कुमार

डीआर का सख्त संकेत

डिप्टी रजिस्ट्रार वैभव कुमार ने साफ कहा कि जीबीएम के जरिए सूचना दी गई थी, लेकिन नियमों के तहत कार्यकाल खत्म होने के तुरंत बाद चुनाव कराए जाने चाहिए थे। इतने लंबे अंतराल के बाद चुनाव डीआर कार्यालय की निगरानी में कराए जाने चाहिए थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिकायत के आधार पर पूरे मामले की जांच की जाएगी और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

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