43 डिग्री गर्मी में हांफ रहा राजनगर एक्सटेंशन: 'नो-कट जोन' में रात भर ब्लैकआउट, शोपीस बने एसी

बिजली कट के बाद अंधेरे में डूबा राजनगर एक्सटेंशन 
विभु मिश्रा 
गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के सख्त निर्देश हैं कि गाजियाबाद को 'नो-कट जोन' में रखा जाए, यानी यहाँ 24 घंटे निर्बाध बिजली मिलनी चाहिए। लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल जुदा है। इन दिनों गाजियाबाद का पॉश इलाका कहा जाने वाला 'राजनगर एक्सटेंशन' बिजली की भयंकर किल्लत से कराह रहा है। करीब 62 गगनचुंबी सोसायटियों और उसमें रहने वाली लगभग 2 लाख की आबादी के लिए यह भीषण गर्मी किसी टॉर्चर से कम नहीं साबित हो रही है।

रात भर बिजली गुल

राजनगर एक्सटेंशन की तमाम सोसायटियों में पिछले कई दिनों से बिजली कटौती का यह तमाशा बदस्तूर जारी है। दिन की चिलचिलाती धूप और अघोषित कटौती से तो लोग परेशान हैं ही, अब पूरी-पूरी रात बिजली गुल रहने लगी है। बीती रात की ही बात करें, तो राज एम्पायर, एसजी ग्रैंड, एससीसी हाइट्स, गुलमोहर गार्डन,युनिनव हाइट्स, महज जीवन सोसायटी और क्लासिक होम्स समेत एक्सटेंशन की ज्यादातर सोसायटियों के लोग रात भर अंधेरे में डूबे रहे। आसमान से बरसती आग और 43 डिग्री के झुलसा देने वाले तापमान के बीच रात भर बिजली न होना, स्थानीय निवासियों के लिए 'कोढ़ में खाज' का काम कर रहा है।

शोपीस बने एसी

बिजली कटने के बाद सोसायटियों का पूरा लोड डीजल जनरेटर पर आ जाता है। लेकिन इन भारी-भरकम जनरेटरों की भी एक सीमा है। डीजी बैकअप से फ्लैटों में सिर्फ लाइट और पंखे ही चल पा रहे हैं। इस घुटन भरी गर्मी में घरों में लगे एयर कंडीशनर महज शोपीस बनकर दीवार पर टंगे हुए हैं। उमस और गर्मी के कारण लोग रात भर सो नहीं पा रहे हैं। रेजिडेंट्स का कहना है कि रात भर बिजली न रहने से सबसे ज्यादा बुरा हाल बीमार बुजुर्गों, बच्चों और सुबह ड्यूटी पर जाने वाले नौकरीपेशा लोगों का है। बिना सोए कोई सुबह काम पर कैसे जा सकता है? ऊपर से डीजी सेट का लगातार चलना जेब पर भी भारी पड़ रहा है।

विभाग का रटा-रटाया जवाब

जब भी परेशान रेजिडेंट्स बिजली विभाग के अधिकारियों या कंट्रोल रूम में फोन करते हैं, तो उन्हें हर बार एक ही रटा-रटाया जवाब थमा दिया जाता है कि पीछे से फॉल्ट है, टीम काम कर रही है। रोज-रोज फॉल्ट होने की बात कहकर विभाग अपनी नाकामियों को छुपा रहा है और जनता को टालने का काम कर रहा है।

रेजिडेंट्स में उबाल

ऐसे में सवाल यह उठता है कि अगर गाजियाबाद कागजों पर 'नो-कट जोन' है, तो फिर इस भीषण गर्मी में बिना किसी पूर्व सूचना के घंटों कटौती क्यों की जा रही है? क्या विभाग ने गर्मियों के सीजन के लिए पहले से कोई मेंटेनेंस या तैयारी नहीं की थी? फिलहाल, बिजली की इस आंख-मिचौली ने राजनगर एक्सटेंशन के दो लाख लोगों का जीना मुहाल कर दिया है और जनता का गुस्सा अब सातवें आसमान पर है।

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