वायदों से सत्ता तक, फिर चुप्पी क्यों? कृष्णा अपरा गार्डन्स में नई एओए पर उठे सवाल

विभु मिश्रा 
गाजियाबाद। कृष्णा अपरा गार्डन्स, इंदिरापुरम की राजनीति एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जिन मुद्दों को लेकर हाल ही में हुए एओए चुनाव में नई टीम ने पुरानी व्यवस्था के खिलाफ मोर्चा खोला था, उन्हीं मुद्दों पर अब उसकी चुप्पी चर्चा का विषय बन गई है। पूर्व की एओए पर वित्तीय अनियमितताओं, अपारदर्शी ठेकों, अवैध चुनाव और मनमानी के आरोप लगाए गए थे। इन्हीं आरोपों को चुनावी मुद्दा बनाकर मौजूदा टीम सत्ता में आई, लेकिन करीब एक महीना बीतने को है और अब तक कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आई।

चुनावी मुद्दे हुए गायब

सोसायटी के लोगों का कहना है कि चुनाव के दौरान पुरानी एओए के खिलाफ करोड़ों रुपये के खर्च, बिना मंजूरी कराए गए सिविल वर्क, टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी जैसे मुद्दे जोर-शोर से उठाए गए। यह भी कहा गया कि निवासियों के हितों की रक्षा की जाएगी और पुरानी कमेटी के फैसलों की जांच कराई जाएगी। लेकिन चुनाव जीतने के बाद वही मुद्दे जैसे फाइलों में दब गए। जिन सवालों को लेकर पूरी टीम जनता के बीच गई थी, उन पर अब कोई खुली कार्रवाई या अपडेट नहीं दिया गया। इससे निवासियों के बीच नाराजगी बढ़ रही है।

डॉल्फिन कंपनी पर सन्नाटा

सोसायटी में मेंटिनेंस कार्यों का ठेका लेने वाली डॉल्फिन कंपनी भी लंबे समय से विवादों के केंद्र में रही है। चुनाव के दौरान कंपनी के कामकाज और अनुबंध को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए थे। कई निवासियों ने उम्मीद जताई थी कि नई एओए इस मामले में सख्त रुख अपनाएगी। लेकिन अब तक डॉल्फिन कंपनी के खिलाफ कोई निर्णायक कदम सामने नहीं आया। इसी वजह से लोगों का आरोप है कि वर्तमान एओए ने उनके भरोसे के साथ विश्वासघात किया है। उनका कहना है कि बदलाव के नाम पर वोट लिए गए, लेकिन सत्ता में आने के बाद वही ढील और हीलाहवाली दिखाई जा रही है।

सचिव का जवाब

जब इस मामले में कृष्णा अपरा गार्डन्स एओए के सचिव सुशील सिंघल से बात की गई तो उनका जवाब भी सवालों के घेरे में आ गया। उन्होंने रूखे लहजे में कहा कि सभी चीजें अभी पाइपलाइन में हैं। जब एजीएम बुलाई जाएगी तो सभी को सूचना दे दी जाएगी।
आपको बता दें कि सुशील सिंघल खुद भी विवादों से घिरे हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने नियमों के विपरीत चुनाव लड़ा। बायलॉज के मुताबिक सेकेंड ओनर को न मतदान का अधिकार है और न चुनाव लड़ने का, लेकिन चुनाव अधिकारी ने उन्हें छूट दी। जीत के बाद उन्हें सचिव जैसे अहम पद पर बैठाया गया और फ्लैट की ऑनरशिप अपने नाम कराने के लिए दो महीने का विशेष समय भी दिया गया। इसकी शिकायत हाल ही में डिप्टी रजिस्ट्रार से भी की है थी जिस पर डीआर द्वारा एओए अध्यक्ष और सचिव को नोटिस भी जारी किया गया था। 

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