विभु मिश्रा
गाजियाबाद। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर ने 3 करोड़ कम्यूटर ट्रिप्स का आंकड़ा पार कर लिया है। पूरे कॉरिडोर के शुरू होने के कुछ ही महीनों में यह उपलब्धि हासिल होना बताता है कि यह सेवा अब एनसीआर में तेजी से लोगों की रोजमर्रा की जरूरत बनती जा रही है। रोज़ाना बड़ी संख्या में नौकरीपेशा, छात्र और अन्य यात्री समय बचाने के लिए नमो भारत को चुन रहे हैं। खास बात यह है कि 2 करोड़ से 3 करोड़ ट्रिप्स तक पहुंचने में पांच महीने से भी कम समय लगा, जो इसकी बढ़ती लोकप्रियता को साफ दिखाता है।
रोजाना बढ़ती यात्री संख्या
नमो भारत में अब आम दिनों में करीब 90 हजार से 1.14 लाख तक यात्री रोज़ सफर कर रहे हैं, जबकि रविवार को भी यह संख्या लगभग 85 हजार रहती है। मार्च 2026 में औसत मासिक राइडरशिप करीब 27 लाख दर्ज की गई, जो पिछले समय के मुकाबले काफी अधिक है। लगातार बढ़ती यह संख्या दिखाती है कि लोग अब सड़क के मुकाबले तेज और तय समय वाले इस विकल्प को ज्यादा भरोसेमंद मान रहे हैं और धीरे-धीरे अपनी यात्रा की आदत बदल रहे हैं।
शुरुआत से अब तक
इस कॉरिडोर का परिचालन 21 अक्टूबर 2023 को साहिबाबाद से दुहाई डिपो के बीच 17 किलोमीटर लंबे खंड से शुरू हुआ था। शुरुआती दौर में यात्रियों की संख्या सीमित थी, लेकिन एक महीने के भीतर ही इसमें तेजी आने लगी। मार्च 2024 में मोदीनगर नॉर्थ और अगस्त 2024 में मेरठ साउथ तक विस्तार हुआ, जिससे परिचालित लंबाई बढ़कर 42 किलोमीटर हो गई। दिसंबर 2024 तक औसत मासिक राइडरशिप लगभग 7 लाख तक पहुंच गई, जो शुरुआती समय के मुकाबले कई गुना ज्यादा थी।
दिल्ली जुड़ते ही बढ़ी रफ्तार
जनवरी 2025 में न्यू अशोक नगर तक दिल्ली खंड शुरू होने के बाद नमो भारत की पहुंच और बढ़ गई। आनंद विहार जैसे बड़े इंटरचेंज स्टेशन के जुड़ने से दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को सीधा लाभ मिला। इसी के साथ यात्रियों की संख्या में बड़ा उछाल आया और 16 मई 2025 को 1 करोड़ ट्रिप्स का आंकड़ा पार हुआ। जुलाई 2025 तक मासिक राइडरशिप लगभग 15 लाख तक पहुंच गई और दिसंबर 2025 में 2 करोड़ का आंकड़ा भी पार हो गया।
पूरा रूट, तेज सफर
22 फरवरी 2026 को मेरठ मेट्रो के साथ शेष 26 किलोमीटर खंड भी शुरू कर दिया गया, जिससे करीब 82 किलोमीटर लंबा पूरा दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर चालू हो गया। इस कॉरिडोर के शुरू होने के बाद यात्रियों की संख्या में और तेजी आई है। दिल्ली से मेरठ के बीच जहां पहले सड़क मार्ग से करीब तीन घंटे लगते थे, वहीं अब यह सफर लगभग एक घंटे में पूरा हो रहा है। मेट्रो कनेक्टिविटी, फीडर बसों और डिजिटल टिकटिंग जैसी सुविधाओं ने इसे और आसान बना दिया है। लगभग 99 प्रतिशत समयबद्ध संचालन के कारण यात्री इसे भरोसेमंद विकल्प के तौर पर अपना रहे हैं।
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