गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन की वीवीआईपी एड्रेसेस सोसायटी में लंबे समय से लटकाया जा रहा ऑडिट अब बड़ा प्रशासनिक मुद्दा बन चुका है। महीनों से चली आ रही खींचतान, आदेशों की अनदेखी और रिकॉर्ड न देने की प्रवृत्ति के बाद मामला अब सीधे एओए के पंजीकरण तक पहुंच गया है। डिप्टी रजिस्ट्रार (डीआर) ने कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि अगर अब भी ऑडिट प्रक्रिया शुरू नहीं हुई तो सोसायटी की एओए को कानून के तहत निरस्त करने में देर नहीं की जाएगी।
शिकायत से खुली परतें
पूरे मामले की शुरुआत ऑडिटर मोहित कौशिक की शिकायत से हुई, जिसमें उन्होंने स्पष्ट आरोप लगाया कि उन्हें विधिवत नियुक्त किए जाने के बावजूद एओए की ओर से कोई सहयोग नहीं दिया गया। अपने पत्र में उन्होंने बताया कि कई बार लिखित रूप से जरूरी दस्तावेज और रिकॉर्ड मांगे गए, लेकिन हर बार या तो जवाब टाल दिया गया या कोई प्रतिक्रिया ही नहीं दी गई। लगातार असहयोग के कारण ऑडिट शुरू तक नहीं हो पाया, जिससे सोसायटी के वित्तीय लेनदेन और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।
छह माह तक टालमटोल
डीआर कार्यालय ने पहले भी इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए एओए को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि ऑडिट प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जाए और सभी आवश्यक दस्तावेज तत्काल उपलब्ध कराए जाएं। इसके लिए समयसीमा भी तय की गई थी, लेकिन करीब छह माह बीतने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी रही। आदेशों की अनदेखी और लगातार टालमटोल को प्रशासन ने गंभीर लापरवाही माना है। यही वजह है कि अब मामला सामान्य प्रक्रिया से निकलकर सख्त कार्रवाई के दायरे में आ गया है।
अब अंतिम चेतावनी जारी
डीआर द्वारा 2 मई 2026 को जारी आदेश में साफ कहा गया है कि एओए को एक हफ्ते की अंतिम मोहलत दी जाती है। इस दौरान ऑडिट शुरू कराना और सभी रिकॉर्ड उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि तय समयसीमा में अनुपालन नहीं किया गया तो उत्तर प्रदेश अपार्टमेंट अधिनियम की धारा 12 (डी) के तहत एओए का पंजीकरण निरस्त कर दिया जाएगा। यानी अब एओए के सामने सिर्फ दो ही रास्ते हैं, या तो तुरंत ऑडिट कराए या फिर सीधे निरस्तीकरण की कार्रवाई का सामना करे।
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