विभु मिश्रा
गाजियाबाद। महानगर की हाईराइज सोसायटियों में रहने वाले लाखों लोगों को राहत देने वाला बड़ा आदेश जारी हुआ है। पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (पीवीवीएनएल) ने साफ कर दिया है कि अब किसी भी सोसायटी में प्रीपेड बिजली मीटर के जरिए मेंटेनेंस चार्ज नहीं काटा जाएगा। मुख्य अभियंता पवन कुमार अग्रवाल की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि बिजली और मेंटेनेंस को अलग-अलग रखा जाए और केवल बिजली बिल न जमा होने पर ही सप्लाई रोकी जा सकती है।
रेजिडेंट्स से मिली शिकायतें
पीवीवीएनएल को लगातार शिकायत मिल रही थीं कि गाजियाबाद की कई सोसायटियों में बिजली रिचार्ज कराने पर पहले मेंटेनेंस चार्ज काट लिया जाता है। इसके बाद बची रकम से बिजली यूनिट मिलती हैं। इस व्यवस्था को लेकर रेजिडेंट्स और एओए के बीच विवाद की स्थिति भी बन रही थी। शिकायतों के बाद गाजियाबाद क्षेत्र-प्रथम के मुख्य अभियंता पवन कुमार अग्रवाल ने अधीक्षण अभियंताओं को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
मीटर से वसूली पर रोक
आदेश में साफ कहा गया है कि किसी भी उपभोक्ता से बिजली मीटर के माध्यम से मेंटेनेंस की रकम नहीं ली जाएगी। अगर किसी बिल्डर, डेवलपर या एओए के खिलाफ ऐसी शिकायत मिलती है तो उसके खिलाफ यूपी विद्युत अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। पीवीवीएनएल ने कहा है कि बिजली मीटर केवल बिजली खपत के लिए इस्तेमाल होगा, उसे मेंटेनेंस वसूली का जरिया नहीं बनाया जा सकता।
बिजली कटौती पर निर्देश
निगम ने यह भी स्पष्ट किया है that मेंटेनेंस चार्ज जमा न होने पर किसी फ्लैट की बिजली नहीं काटी जाएगी। बिजली सप्लाई रोकने की कार्रवाई सिर्फ उसी स्थिति में हो सकती है जब उपभोक्ता बिजली बिल जमा न करे। यानी अब मेंटेनेंस विवाद का असर सीधे बिजली कनेक्शन पर नहीं पड़ेगा।
कॉमन एरिया का हिसाब
पीवीवीएनएल ने आदेश में कहा है कि प्रीपेड मीटर का बैलेंस सिर्फ बिजली खपत, लिफ्ट, वाटर पंप, स्ट्रीट लाइट और दूसरी कॉमन सुविधाओं के संचालन में ही इस्तेमाल किया जाए। इसके अलावा एओए और आरडब्ल्यूए को कॉमन एरिया बिजली और फ्लैट की व्यक्तिगत बिजली का अलग-अलग हिसाब रखने के निर्देश दिए गए हैं।
ऑनलाइन भुगतान पर जोर
आदेश में मेंटेनेंस वसूली के लिए पारदर्शी व्यवस्था अपनाने को भी कहा गया है। पीवीवीएनएल ने निर्देश दिए हैं कि मेंटेनेंस शुल्क चेक, ऑनलाइन ट्रांसफर या अन्य अधिकृत माध्यमों से लिया जाए। इससे भुगतान का रिकॉर्ड रहेगा और बाद में विवाद की स्थिति कम होगी।
रेजिडेंट्स को क्या फायदा
इस आदेश को सोसायटी रेजिडेंट्स के लिए राहत माना जा रहा है। अब लोगों को बिजली रिचार्ज और मेंटेनेंस भुगतान का अलग हिसाब मिलेगा। साथ ही यह भी साफ हो जाएगा कि बिजली के नाम पर कितनी रकम ली जा रही है और मेंटेनेंस के नाम पर कितनी। हालांकि इस आदेश के बाद एओए और बिल्डरों को मेंटेनेंस वसूली के लिए नई व्यवस्था बनानी पड़ेगी।
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