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| राजनगर एक्सटेंशन |
विभु मिश्रा
गाजियाबाद। शहर की हाईराइज सोसायटियों में बिजली रिचार्ज के जरिए मेंटेनेंस वसूली पर रोक लगाने के पीवीवीएनएल के फैसले ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। एक तरफ जहां हजारों फ्लैट मालिक इसे राहत भरा कदम बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ शहर की कई एओए और आरडब्ल्यूए इस आदेश के खिलाफ खुलकर सामने आ गई हैं। उनका कहना है कि इस फैसले से सोसायटियों का संचालन प्रभावित होगा और व्यवस्थाएं बिगड़ सकती हैं।
निवासियों को मिली राहत
पीवीवीएनएल के मुख्य अभियंता पवन कुमार अग्रवाल की ओर से जारी आदेश में साफ कहा गया है कि प्रीपेड बिजली मीटर का इस्तेमाल केवल बिजली खपत के लिए किया जाएगा। किसी भी सोसायटी में बिजली रिचार्ज से मेंटेनेंस शुल्क की कटौती नहीं की जा सकेगी। साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि मेंटेनेंस जमा न होने पर किसी फ्लैट की बिजली नहीं काटी जा सकती। निगम का कहना है कि बिजली और मेंटेनेंस का हिसाब अलग-अलग रखा जाए ताकि उपभोक्ताओं को पारदर्शिता मिल सके।
एओए-आरडब्ल्यूए में बढ़ा आक्रोश
इस फैसले के बाद कई एओए और आरडब्ल्यूए ने नाराजगी जताई है। यूनिनाव हाइट्स एओए सचिव अमित सिलावट का कहना है कि यह केवल राजनगर एक्सटेंशन का मुद्दा नहीं बल्कि पूरे शहर की सोसायटियों से जुड़ा मामला है। उन्होंने कहा कि इसी व्यवस्था के आधार पर अधिकतर सोसायटियों का संचालन होता है और प्रशासनिक दखल से समस्याएं और बढ़ेंगी। वहीं क्लासिक रेजिडेंसी एओए अध्यक्ष देशमणि शर्मा ने सभी एओए और आरडब्ल्यूए से एकजुट होकर इस फैसले का विरोध करने की अपील की है। उनका कहना है कि यह मामला सोसायटी के अधिकारों और संचालन व्यवस्था से जुड़ा हुआ है।
फैसले पर बंटी राय
सोसायटी निवासियों के बीच भी इस फैसले को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही हैं। मुरारी लाल शर्मा ने इसे अच्छा कदम बताते हुए कहा कि इससे एओए और आरडब्ल्यूए की मनमानी पर रोक लगेगी और किसी निवासी की बिजली या पानी दबाव बनाकर बंद नहीं किया जा सकेगा। वहीं अनिल चौहान का कहना है कि अगर यह व्यवस्था गलत थी तो पहले इसकी अनुमति क्यों दी गई। उनका मानना है कि सरकार को मेंटेनेंस वसूली का स्पष्ट तरीका भी तय करना चाहिए था, वरना आने वाले समय में नई परेशानियां खड़ी हो सकती हैं। अब इस आदेश के बाद शहर की कई सोसायटियों में नई व्यवस्था को लेकर चर्चा और विरोध दोनों तेज हो गए हैं।
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