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गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन की गौर कैस्केड्स अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन में पिछले एक साल से चल रहे सदस्यता विवाद पर डिप्टी रजिस्ट्रार ने बड़ा फैसला सुनाया है। 29 अप्रैल 2026 के आदेश में पूर्व सचिव पुनीत गोयल की सदस्यता और सचिव पद को पूरी तरह वैध माना गया है। रजिस्ट्रार ने कहा कि उन पर लगे सभी आरोप रिकॉर्ड में टिक नहीं पाए। इस फैसले से मौजूदा एओए को करारा झटका लगा है।
चुनाव से शुरू हुआ विवाद
11 मई 2025 को एओए के 10 बोर्ड सदस्य चुने गए थे। इसके बाद वर्तमान एओए अध्यक्ष और तत्कालीन बोर्ड सदस्य संजीव कुमार मलिक समेत तीन अन्य सदस्यों ने शिकायत की थी कि छह सदस्यों ने नियम 26 तोड़कर उन्हें बिना सूचना दिए अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष चुन लिए। इसके अलावा आरोप लगाया था कि पुनीत गोयल ने 21 नवंबर 2025 को फ्लैट H-358 बेचने के बाद भी बोर्ड में बने रहे। शिकायतकर्ताओं ने दावा किया था कि मकान बेचते ही सदस्यता खत्म हो जाती है।
रिकॉर्ड से साफ हुई तस्वीर
डिप्टी रजिस्ट्रार ने दस्तावेजों की जांच में पाया कि पुनीत गोयल ने H-358 बेचने के बाद 28 नवंबर 2025 को उसी सोसाइटी में फ्लैट A-1504 खरीद लिया था। दोनों फ्लैट की ट्रांसफर एनओसी, शुल्क रसीद और रजिस्ट्री रिकॉर्ड में दर्ज है। आदेश में साफ लिखा है कि यह सोसाइटी छोड़ने का मामला नहीं, बल्कि एक फ्लैट से दूसरे फ्लैट में स्थानांतरण है। इसलिए सदस्यता और सचिव पद स्वतः समाप्त होने का आरोप, तथ्य और कानूनी दोनों रूप से गलत है।
नई एओए की किरकिरी
रजिस्ट्रार ने यह भी माना कि पुनीत गोयल को A-1504 के आधार पर सचिव पद पर दोबारा चुनना नियमों के तहत सही है। पूर्व में की गई पुलिस शिकायतें भी जांच में टिकाऊ नहीं पाई गईं। फैसले के बाद पूर्व प्रबंधन बोर्ड ने कहा कि बिना कानूनी आधार के आरोप लगाकर सोसाइटी में भ्रम और नकारात्मक माहौल बनाया गया। इस फैसले से नई एओए के दावों की हवा निकल गई है।
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| पूर्व सचिव पुनीत गोयल |
क्या बोले पुनीत गोयल
पूर्व सचिव पुनीत गोयल ने कहा कि पिछले एक साल से मेरे और मेरे परिवार पर लगातार मानसिक दबाव बनाया गया। व्यक्तिगत हमले किए गए, लेकिन मैंने सोसाइटी का काम रुकने नहीं दिया। मेरा हमेशा प्रयास रहा कि पारदर्शिता और रिकॉर्ड के आधार पर काम हो। उप निबंधक के आदेश ने सच को सामने ला दिया है। अब निवासियों से अपील है कि आरोप-प्रत्यारोप छोड़कर शांति और सहयोग का माहौल बनाएं। उन्होंने कहा कि वित्तीय मामलों में विशेष ऑडिट के आदेश का मैं स्वागत करता हूं, दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा।
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