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एएसआर रियलटेक-राइट अर्थ इंफ्रा पर 29.41 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप, पीड़ित खरीदार कार्रवाई को डीएम से लगाएंगे गुहार
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गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन में फ्लैट और दुकान खरीदने का सपना देखने वाले 39 से अधिक खरीदारों के साथ करीब 29.41 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि मेसर्स एएसआर रियलटेक लिमिटेड और मेसर्स राइट अर्थ इंफ्रा एलएलपी से जुड़े निदेशकों और कर्मचारियों ने योजनाबद्ध तरीके से निवेशकों से करोड़ों रुपये वसूले, लेकिन तय समय पर न तो कब्जा दिया और न ही रकम लौटाई। खरीदारों का कहना है कि अब पूरा मामला कर्मचारियों पर डालकर कंपनियां अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रही हैं। मामले में कमिश्नरेट गाजियाबाद के नंदग्राम थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है।
विज्ञापन दिखाकर कराया निवेश
शिकायतकर्ताओं के अनुसार बिल्डर कंपनियों ने राजनगर एक्सटेंशन स्थित खसरा संख्या 1067 और 1068 पर 'एएसआर सेंट्रल एवेन्यू' कमर्शियल और 'मक्कर प्रथम' रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट के आकर्षक विज्ञापन जारी किए थे। इसके अलावा कंपनी के अधिकृत सेल्स ऑफिस के माध्यम से भी लोगों को निवेश के लिए प्रेरित किया गया। इन दावों पर भरोसा कर दर्जनों लोगों ने फ्लैट और दुकानों की बुकिंग कराई। शिकायतकर्ता संजय गर्ग और उनकी पत्नी ने ही नगद, चेक और आरटीजीएस के जरिए अलग-अलग किस्तों में करीब 1.17 करोड़ रुपये कंपनियों द्वारा बताए गए खातों में जमा किए।
कर्मचारी पर मढ़ा पूरा आरोप
पीड़ितों का आरोप है कि जब खरीदारों ने कब्जा और रजिस्ट्री की मांग शुरू की तो कंपनियों का रवैया बदल गया। मुख्य सेल्स पार्टनर दीपक शर्मा उर्फ नितिन शर्मा अचानक गायब हो गया। इसके बाद बिल्डर कंपनियों ने दावा करना शुरू कर दिया कि उन्हें कोई भुगतान मिला ही नहीं और पूरा फर्जीवाड़ा सिर्फ उसी कर्मचारी ने किया है। जबकि खरीदारों का कहना है कि भुगतान कंपनियों के अधिकृत बैंक खातों में किया गया था और अब कर्मचारी को आगे कर खुद को बचाने की कोशिश की जा रही है।
फर्जी खाते और दस्तावेजों का इस्तेमाल
एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए आरोपियों ने मिलते-जुलते नामों से कई बैंक खाते खुलवाए। जांच में डुप्लिकेट नंबर वाले फर्जी आधार कार्ड इस्तेमाल किए जाने की बात भी सामने आई है। इतना ही नहीं, जिन दस्तावेजों पर कंपनी की मोहर और अधिकृत हस्ताक्षर मौजूद हैं, अब उन्हीं दस्तावेजों को कंपनियां मानने से इनकार कर रही हैं। पीड़ितों का कहना है कि पूरा खेल सुनियोजित तरीके से किया गया ताकि करोड़ों रुपये हड़पने के बाद जिम्मेदारी से बचा जा सके।
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| अधूरी पड़ी साइट |
इन पर हुई एफआईआर
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| फरार आरोपी दीपक शर्मा |
इस मामले में संदीप कुमार गुप्ता, पी.के. गुप्ता, वरुण मक्कर, प्रमोद कुमार सिंघल, प्रीति गुप्ता, निशी गुप्ता, गौरव गोयल, आलोक जैन, रेनू सिंघल, अंकुर सिंघल, विपिन कुमार और सेल्स पार्टनर दीपक शर्मा उर्फ नितिन शर्मा को नामजद किया गया है। पीड़ितों ने आर्थिक अपराध शाखा से पूरे मामले की विस्तृत जांच कराने, आरोपियों के बैंक खाते फ्रीज करने और उनकी संपत्तियां कुर्क कर निवेशकों की रकम सुरक्षित कराने की मांग की है।
डीएम से लगाएंगे न्याय की गुहार
ठगी के शिकार खरीदार सोमवार को जिलाधिकारी से मिलकर पूरे मामले की जानकारी देंगे और आरोपी बिल्डरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करेंगे। पीड़ित नितिन शर्मा का कहना है कि जब तक दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक सभी खरीदार न्याय की लड़ाई जारी रखेंगे।
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