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विभु मिश्रा
गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन स्थित रिवर हाइट्स सोसायटी में रविवार को होने वाले एओए चुनाव से ठीक पहले ऐसा घटनाक्रम सामने आया है, जिसने पूरे चुनाव को अनिश्चितता के भंवर में डाल दिया है। पहले डिप्टी रजिस्ट्रार की ओर से एक पत्र जारी हुआ, फिर चुनाव अधिकारी ने उसी का हवाला देते हुए चुनाव स्थगित कर दिया। इसके बाद डिप्टी रजिस्ट्रार ने नया पत्र जारी कर स्पष्ट कर दिया कि उनके कार्यालय से चुनाव स्थगन का कोई आदेश जारी ही नहीं किया गया था। अब चुनाव अधिकारी ऋचा चौधरी और उनकी टीम का फोन भी स्विच ऑफ बताया जा रहा है, जिससे हजारों निवासियों के बीच यह सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर रविवार को मतदान होगा या नहीं।
हाईकोर्ट आदेश का हवाला
पूरे विवाद की शुरुआत 12 जून को डिप्टी रजिस्ट्रार फर्म्स, सोसाइटीज एवं चिट्स की ओर से जारी पत्र से हुई। यह पत्र रिवर हाइट्स फेज-1 एओए चुनाव से जुड़े मामले में चुनाव अधिकारी को भेजा गया था। पत्र में इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित याचिका और उससे संबंधित आदेशों का उल्लेख करते हुए मतदाता सूची से जुड़े विवाद का परीक्षण करने और यूपी अपार्टमेंट एक्ट-2010 व संबंधित उपविधियों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया था। हालांकि पत्र में चुनाव स्थगित करने का कोई स्पष्ट निर्देश नहीं दिखाई देता। इसी पत्र की तारीख को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कुछ निवासियों का दावा है कि पत्र पर अंकित तारीख को री-राइट किया गया प्रतीत होता है, जिससे उसकी प्रक्रिया को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं।
फिर आया स्थगन आदेश
इसके अगले ही दिन 13 जून को चुनाव अधिकारी ऋचा चौधरी की ओर से कार्यालय आदेश जारी किया गया। इस आदेश में कहा गया कि डिप्टी रजिस्ट्रार के 12 जून के निर्देशों के अनुपालन में चुनाव प्रक्रिया को कुछ दिनों के लिए स्थगित किया जा रहा है तथा मतदान की अगली तिथि बाद में घोषित की जाएगी। आदेश सामने आते ही सोसायटी में यह माना जाने लगा कि 14 जून को प्रस्तावित मतदान अब नहीं होगा। कई निवासियों ने चुनाव की तैयारियां भी रोक दीं और पूरा चुनावी माहौल अचानक ठंडा पड़ गया।
डीआर ने पलटा आदेश
मामला तब और दिलचस्प हो गया जब 13 जून को ही डिप्टी रजिस्ट्रार की ओर से एक और पत्र सामने आया। इस पत्र में साफ तौर पर कहा गया कि उनके कार्यालय द्वारा चुनाव स्थगित करने का कोई आदेश जारी नहीं किया गया है। साथ ही चुनाव अधिकारी को निर्देश दिए गए कि यूपी अपार्टमेंट एक्ट-2010 और सोसायटी के उपविधियों के अनुरूप आवश्यक परीक्षण कर निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराई जाए, ताकि एसोसिएशन के कार्य सुचारू रूप से चलते रहें। इस पत्र ने चुनाव अधिकारी के स्थगन आदेश पर ही सवाल खड़े कर दिए और निवासियों के बीच भ्रम और बढ़ गया।
बंद फोन, बढ़ता रहस्य
रविवार को मतदान की निर्धारित तिथि होने के बावजूद अब तक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सकी है। चुनाव अधिकारी ऋचा चौधरी और उनकी टीम से संपर्क नहीं हो पा रहा है और उनके फोन स्विच ऑफ बताए जा रहे हैं। ऐसे में सोसायटी के निवासियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर अंतिम आदेश कौन सा माना जाए। एक तरफ चुनाव स्थगन का आदेश है तो दूसरी तरफ डिप्टी रजिस्ट्रार का पत्र, जिसमें स्थगन आदेश जारी करने से ही इनकार किया गया है। इस विरोधाभास ने रिवर हाइट्स के चुनाव को मतदान से पहले ही रहस्य और संशय के केंद्र में ला खड़ा किया है।
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