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विभु मिश्रा
गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन स्थित एसजी ग्रैंड अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (एओए) में पिछले दो वित्तीय वर्षों के खातों और दस्तावेजों को लेकर विवाद खुलकर सामने आ गया है। जहाँ वर्तमान कार्यवाहक एओए ने पूर्व पदाधिकारियों पर वर्ष 2023-24 और 2024-25 के वित्तीय अभिलेख ऑडिटर को उपलब्ध न कराने का आरोप लगाते हुए डिप्टी रजिस्ट्रार से शिकायत की है, वहीं पूर्व अध्यक्ष विनय गिल ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए एओए के कालातीत (एक्सपायर) होने का हवाला देकर कार्यवाहक समिति की वैधता और वित्तीय भुगतानों पर ही गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले को गंभीर मानते हुए डिप्टी रजिस्ट्रार ने पूर्व पदाधिकारियों को तत्काल रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के निर्देश जारी किए हैं।
रिकॉर्ड न मिलने से अटका ऑडिट
कार्यवाहक एओए के अध्यक्ष अरुण कुमार मलिक ने 8 जून 2026 को जिलाधिकारी और डिप्टी रजिस्ट्रार को भेजे पत्र में कहा कि सोसायटी के पिछले तीन वर्षों के ऑडिट के लिए विभागीय स्तर पर प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके कार्यकाल 2025-26 का पूरा डेटा और वित्तीय अभिलेख ऑडिटर को उपलब्ध करा दिए गए हैं, लेकिन पूर्व पदाधिकारी वर्ष 2023-24 और 2024-25 के दस्तावेज देने से बच रहे हैं। इससे ऑडिट कार्य आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
करोड़ों के लेन-देन पर संशय
शिकायत पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि बिल्डर हैंडओवर अवधि और उससे जुड़े वित्तीय वर्षों के दौरान हुए करोड़ों रुपये के लेन-देन और सोसायटी के हिसाब-किताब की वास्तविक स्थिति अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है। कार्यवाहक एओए अध्यक्ष अरुण मालिक का कहना है कि संबंधित वर्षों के खाते और दस्तावेज सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सोसायटी के धन का उपयोग किस प्रकार किया गया। शिकायत में पूर्व पदाधिकारियों पर ऑडिट प्रक्रिया में सहयोग न करने तथा दस्तावेज रोककर रखने के आरोप लगाए गए हैं। कार्यवाहक एओए अध्यक्ष की इसी शिकायत पर संज्ञान लेते हुए डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालय ने 15 जून 2026 को पूर्व अध्यक्ष और सचिव को पत्र जारी किया। आदेश में कहा गया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच अधिकारी अथवा वर्तमान कार्यवाहक एओए को ऑडिट और जांच के लिए आवश्यक अभिलेख तत्काल उपलब्ध कराए जाएं और की गई कार्रवाई से कार्यालय को अवगत कराया जाए।
पूर्व अध्यक्ष विनय गिल का पलटवार
उधर इस मामले में जब पूर्व अध्यक्ष विनय गिल से बात की गई तो उन्होंने इस पूरे मामले को गलत करार दिया। उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को नकारते हुए कहा कि उनके द्वारा 1800 पेज की स्कैन कॉपी वर्तमान कार्यवाहक अध्यक्ष अरुण मालिक को एओए हैंडओवर करते ही सौंपी जा चुकी है। 2023-24 का इंटर्नल ऑडिट उनके द्वारा पूर्व में ही कराया जा चुका है उसकी भी रिपोर्ट अरुण मालिक को सौंपी जा चुकी है। उन्होंने उल्टा अरुण मालिक पर आरोप लगाते हुए सवाल किया कि जब एओए जनवरी में कालातीत हो चुकी है तो उन्होंने किस अधिकार से ऑडिटर को संस्था के पैसे का भुगतान किया है? इसके अलावा ऑडिट के आदेश बीते साल अक्टूबर में हुए थे तब उन्होंने ऑडिट क्यों नहीं कराया? अब कालातीत होने के बाद उन्हें ऑडिट करने का कोई अधिकार ही नहीं है और चुनाव के बाद जो भी नई एओए बनती वो कराती ऑडिट। विनय गिल ने पूर्व डिप्टी रजिस्ट्रार वैभव कुमार पर भी गंभीर आरोप लगाये हैं।
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