विभु मिश्रा
गाजियाबाद। इंदिरापुरम की शिप्रा कृष्णा विस्टा सोसाइटी में प्रबंधन समिति और निवासियों के बीच चल रहा विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। जिला प्रशासन द्वारा नियुक्त निर्वाचन अधिकारी की रिपोर्ट सामने आने के बाद सोसाइटी में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। निवासियों का आरोप है कि वर्तमान प्रबंधन समिति चुनाव कराने के बजाय उसे लगातार टालने और बाधित करने में लगी हुई है। वहीं निर्वाचन अधिकारी ने भी अपने पत्र में चुनाव के लिए आवश्यक अभिलेख उपलब्ध न कराए जाने का उल्लेख किया है।
बार-बार मांगे अभिलेख
जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी एवं नियुक्त निर्वाचन अधिकारी प्रशांत कुमार सिंह ने 15 जून 2026 को डिप्टी रजिस्ट्रार, फर्म, सोसायटीज एवं चिट्स को भेजे पत्र में बताया है कि शिप्रा कृष्णा विस्टा रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन की कालातीत प्रबंध समिति के चुनाव कराए जाने हैं। उन्होंने बताया कि डिप्टी रजिस्ट्रार के 6 मार्च और 13 मई 2026 के आदेशों के अनुपालन में चुनाव प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसके लिए वर्तमान पदाधिकारियों से वैध सदस्यों की सूची, पंजीकृत अभिलेख और अन्य आवश्यक दस्तावेज मांगे गए। 27 मई, 5 जून और 10 जून को लगातार नोटिस जारी किए गए, लेकिन आवश्यक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया। निर्वाचन अधिकारी ने पत्र में कहा है कि रिकॉर्ड न मिलने से चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
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| चुनाव अधिकारी का 15 जून का शिकायती पत्र |
नोटिस हटाने के आरोप
निवासियों का आरोप है कि प्रशासनिक निर्देशों के बावजूद चुनाव कराने में सहयोग नहीं किया जा रहा है। उनका कहना है कि चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद मामले को न्यायालय तक ले जाकर प्रक्रिया को रोकने का प्रयास किया गया। कुछ निवासियों ने यह भी आरोप लगाया है कि निर्वाचन अधिकारी द्वारा जारी नोटिस सोसाइटी के सूचना पट्ट से हटवा दिए गए, जिससे आम सदस्यों तक चुनाव संबंधी जानकारी न पहुंच सके। निवासियों का कहना है कि यदि ऐसा हुआ है तो यह चुनावी पारदर्शिता पर सीधा प्रहार है।
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| एओए प्रबंधन के खिलाफ सोसायटी के रेजिडेंट्स |
प्रबंधन पर उठे सवाल
सोसाइटी के कई सदस्यों ने वित्तीय मामलों और रखरखाव निधि के उपयोग को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि खर्च और निर्णयों की पूरी जानकारी सदस्यों को नहीं दी जाती। कुछ लोगों का कहना है कि प्रबंधन से असहमति रखने वालों पर दबाव बनाया जाता है और विरोध करने वालों को विभिन्न माध्यमों से परेशान किया जाता है। निर्वाचन अधिकारी की रिपोर्ट सामने आने के बाद निवासियों के आरोपों को नई मजबूती मिली है। अब हजारों फ्लैट स्वामियों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया पर टिकी हुई है। निवासियों का कहना है कि उनकी मांग केवल इतनी है कि सोसाइटी में जल्द निष्पक्ष, पारदर्शी और लोकतांत्रिक चुनाव कराए जाएं ताकि प्रबंधन सभी सदस्यों के विश्वास के साथ संचालित हो सके।
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