हाल-ए-राजनगर: मानसून सिर पर, नाले गंदगी से अटे पड़े! महापौर से शिकायत

राजनगर में गंदगी से लबालब नाला 
विभु मिश्रा 
गाजियाबाद। मानसून की दस्तक से पहले राजनगर क्षेत्र में नालों की सफाई को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। अधिवक्ता आकाश वशिष्ठ ने महापौर सुनीता दयाल को पत्र भेजकर वार्ड-84 के पार्षद प्रवीण चौधरी पर क्षेत्र की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष जलभराव की समस्या सामने आने के बावजूद इस बार भी नालों और नालियों की सफाई को लेकर अपेक्षित कार्रवाई नहीं दिखाई दे रही है।

मानसून से पहले चिंता

महापौर को भेजे गए पत्र में आकाश वशिष्ठ ने कहा है कि राजनगर शहर की प्रमुख और पॉश कॉलोनियों में शामिल है, जहां बड़ी संख्या में वरिष्ठ अधिकारी, उद्योगपति, व्यापारी और राजनीतिक हस्तियां निवास करती हैं। इसके बावजूद वर्षा से पहले जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए गंभीर प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। उनका कहना है कि पिछले वर्ष भी कई सेक्टरों में जलभराव की स्थिति बनी थी, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा था।
पॉश इलाके राजनगर में नाले का हाल

पार्षद पर गंभीर आरोप

पत्र में स्थानीय पार्षद और डिप्टी मेयर प्रवीण चौधरी पर क्षेत्रीय समस्याओं के प्रति उदासीन रहने का आरोप लगाया गया है। वशिष्ठ का कहना है कि जनता की समस्याओं के समाधान के बजाय केवल प्रचार-प्रसार पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि वार्ड के कई नाले और नालियां अब भी गंदगी से भरे हुए हैं, जिससे बरसात के दौरान हालात बिगड़ सकते हैं।

अधिकारियों के आवास पास

शिकायत में विशेष रूप से गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष कार्यालय के सामने आईएमटी से सटे नाले का मुद्दा उठाया गया है। वशिष्ठ ने कहा कि यह स्थान शहर के सबसे महत्वपूर्ण इलाकों में शामिल है। इसके आसपास पुलिस कमिश्नर, जिलाधिकारी और नगर आयुक्त समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों के आवास मौजूद हैं। इसके बावजूद नाले की सफाई नहीं होना नगर निगम की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है।
सफाई के अभाव में बदहाल नाला 

निगम की छवि पर असर

आकाश वशिष्ठ ने कहा कि इस तरह की स्थिति से नगर निगम और सरकार की छवि पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। प्रतिदिन विभिन्न क्षेत्रों से लोग अधिकारियों से मिलने यहां पहुंचते हैं और बदहाल सफाई व्यवस्था गलत संदेश देती है। उन्होंने महापौर से मांग की है कि बारिश शुरू होने से पहले नालों की व्यापक सफाई कराई जाए, ताकि पिछले वर्ष जैसी जलभराव की स्थिति दोबारा न बने।
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